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ज़ोजिला परियोजना की सुरंग-1 की खुदाई का काम बड़ी सफलता के रूप में पूर्ण

ज़ोजिला परियोजना की 472 मीटर सुरंग-1 की खुदाई का काम एक बड़ी सफलता के रूप में पूरा कर लिया गया। सोमवार (22 नवंबर) को दिन का उजाला टनल-1 के ट्यूब-2 में प्रवाहित हुआ।

परियोजना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसे निर्धारित समय से पूर्व पूर्ण कर लिया गया। पानी लगातार रिस रहा था, जिससे खुदाई में बहुत मुश्किल आ रही थी।”

ज़ोजिला को भारत की सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना में से एक माना जाता है। यह एक 14.15 किलोमीटर लंबी सुरंग है। यह लगभग 3,000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जो ज़ोजिला दर्रे के नीचे स्थित है।

परियोजना की कुल लंबाई 32.78 किलोमीटर है और इसे दो भागों में बाँटा गया है।

परियोजना के भाग-1 में 18 किलोमीटर का मार्ग सम्मिलित है, जो सोनमर्ग और तलताल को जोड़ता है। इसमें प्रमुख पुल और जुड़वाँ सुरंग हैं। यह सीतकारी गाँव (सोनमर्ग) से आरंभ होता है और बालटाल कैंप के पास ज़ोजिला सुरंग के पश्चिमी पोर्टल पर समाप्त होता है। यह श्रीनगर से करगिल-लेह तक हर मौसम में संपर्क प्रदान करेगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से अति महत्वपूर्ण है। मार्ग के 2023 के अंत तक पूरा होने की अपेक्षा है।

14.15 किमी लंबी सुरंग परियोजना का अन्य घटक है। टनल-1 में दो ट्यूब हैं, जिनकी लंबाई क्रमशः 472 और 448 मीटर है। 4 नवंबर को दीपावली के मौके पर 448 मीटर ट्यूब में दिन का उजाला प्रवाहित किया गया था।

पहुँच सड़कों को बनाने के बाद निर्माण करने वाली कंपनी द्वारा मई 2021 में परियोजना का काम आरंभ किया गया था। इसके पश्चात 2 किलोमीटर की लंबाई वाली ट्विन ट्यूब, जहाँ काम जोरों पर है, अप्रैल 2022 के महीने में दिन की रोशनी को प्राप्त करेगा।