राजनीति
किसानों का तुष्टीकरण नहीं, संतुष्टीकरण है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य

लखीमपुर खीरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, परंतु इसमें कोई संदेह नहीं कि कृषि और किसान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आर्थिक एवं लोक कल्याणकारी नीतियों के केंद्र में रहे हैं। योगी का मानना है कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है।

अन्य दलों की तरह किसान को राजनीतिक लाभ के लिए सिर्फ एक संगठित समुदाय के रूप में देखने की बजाय वे किसानों को अन्नदाता एवं अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानते हैं। यही कारण है कि मार्च 2017 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही वे किसानों की आकांक्षाओं को पूरा करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में निरंतर प्रयत्नशील दिखाई दिए हैं।

योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि विषम परिस्थितियों में भी कृषि और किसान का कल्याण सरकार का लक्ष्य रहा है। आँकड़ों के अनुसार विगत साढ़े चार वर्षों में उत्तर प्रदेश ने खाद्यान्न उत्पादन में नया रिकार्ड बनाया है। वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रति वर्ष 139 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले अब 163.45 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष खाद्यान्न उत्पादन हो गया है।

तमाम अर्थशास्त्रियों की आशंकाओं और नौकरशाही बुद्धिमत्ता को दरकिनार कर योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल के प्रारंभ में ही लगभग 36,000 करोड़ रुपये से 86 लाख लघु एवं सीमांत किसानों को ऋण मोचन का लाभ पहुँचाया। एक मंझे हुए कृषि अर्थशास्त्री की तरह शायद उन्हें अहसास था कि कृषि और किसान को अलग कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तीव्र गति नहीं दी जा सकती।

किसानों के ऋण मोचन के साथ ही मुख्यमंत्री योगी ने उन्हें समय से फसलों का सही मूल्य दिलाने के अलावा कृषि और किसानों के लिए दशकों से अभिशाप बन चुके बिचौलियों को निकाल फेंकने का संकल्प लिया और साढ़े चार वर्ष बाद इसमें सफल होते हुए दिखाई देते हैं।

यही वजह है कि उत्तर प्रदेश किसानों को देय अनुदान को डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने वाला देश में पहला राज्य बना। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना जिसने किसानों के लिए बाज़ार को व्यापक बनाने हेतु मंडी अधिनियम में संशोधन किया।

योगी ने 125 ई-नाम मंडियों की स्थापना सुनिश्चित की जिसमें 87 लाख किसान एवं 34,000 व्यवसायी जुड़े। राष्ट्रीय कृषि बाज़ार योजना में 125 मंडियों के माध्यम से 7,131 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ। योगी ने 45 कृषि उत्पाद मंडी शुल्क से मुक्त किए तथा मंडी शुल्क 1 प्रतिशत घटाया और प्रदेश की 27 मंडियों का आधुनिकीकरण किया गया।

कृषि और किसान कल्याण योजनाओं की अगर चर्चा करें तो पाएँगे कि उत्तर प्रदेश ने सुनिश्चित किया है कि इनका लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुँचे और केंद्र की योजनाओं को प्रदेश में लागू करने और लाभार्थियों को लाभ देने में अग्रणी स्थान पर है। पीएम किसान के सर्वाधिक लाभार्थी उत्तर प्रदेश में ही हैं।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में लगभग 2.54 करोड़ किसानों को अब तक 37,521 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 2.22 करोड़ किसानों का पंजीकरण करते हुए 27.56 लाख किसानों को 2,376 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का भुगतान किया गया है।

कृषकों को सम्मानित करते योगी आदित्यनाथ (दिसंबर 2018)

प्रधानमंत्री किसान मान धन योजना में बीमित किसान (पुरुष एवं स्त्री) के लिए 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर 3,000 रुपये की मासिक पेंशन देने की व्यवस्था है और उत्तर प्रदेश में अब तक 2.52 लाख लाभार्थियों को इसका लाभ दिया जा चुका है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में किसानों को 3.76 करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड एवं 1.66 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किए गए।

योगी ने जब सत्ता संभाली तब गन्ना किसानों के भुगतान की समस्या विकराल रूप ले चुकी थी। चीनी मिलें बंद हो रही थीं और गन्ने की फसल औने-पौने दाम पर बेची जा रही थी। योगी आदित्यनाथ ने 45.44 लाख किसानों को 1.44 लाख करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य का रिकॉर्ड भुगतान सुनिश्चित किया।

पिपराइच, मुंडेरवा एवं रमाला चीनी मिलों की पुनर्स्थापना सहित प्रदेश की 20 चीनी मिलों का आधुनिकीकरण एवं विस्तार किया गया। इसके साथ ही पूर्व स्थापित खांडसारी इकाइयों के लाइसेंस स्वीकृत किए गए जिससे 66,450 टीसीडी अतिरिक्त पेराई क्षमता बढ़ी तथा 30,250 रोजगार सृजित हुए।

गन्ना किसान की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में लिए गए निर्णयों के ही परिणाम है कि यूपी में 476 लाख मेट्रिक टन चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन संभव हुआ। पिछले दिनों ही किसान हितों को ध्यान में रखकर गन्ना मूल्यों में 25 रुपये की वृद्धि की गई है।

धान, गेहूँ सहित अनेक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वद्धि करके लागत का लगभग दो गुना किया गया है। किसानों से 435 लाख मेट्रिक टन खाद्यान्न क्रय कर 79,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। केवल वर्ष 2020-21 में 66.83 लाख मेट्रिक टन धान तथा 1.06 लाख मेट्रिक टन मक्का की खरीद की, जो लक्ष्य से डेढ़ गुना ज्यादा है।

कृषि एवं किसान कल्याण के लिए संरचनात्मक बदलाव भी किए जा रहे हैं। योगी ने उत्तर प्रदेश किसान सम्मान समृद्धि आयोग का गठन किया। इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता के फल एवं सब्जी के पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु हापुड़, मऊ, बहराइच, अलीगढ़, फतेहपुर, रामपुर एवं अंबेडकरनगर में सात मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा 20 कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना की गई।

झाँसी में कृषि विश्वविद्यालय का लोकार्पण (अगस्त 2020)

गोरखपुर में वैटरनरी विश्वविद्यालय बनाने का निर्णय लिया गया। योगी की कृषि और किसान कल्याण की नीतियों का ही परिणाम है कि गन्ना, चीनी, इथेनॉल एवं सैनेटाइज़र उत्पादन में लगातार चौथी बार देश में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है। खाद्यान्न, गेहूँ, आलू, हरी मटर, आम, आँवला और दुग्ध उत्पादन तथा तिलहन उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश देश प्रथम स्थान पर है।

अगर किसान नाखुश होता तो ये संभव नहीं था। योगी आदित्यनाथ किसानों के तुष्टिकरण की बजाय संतुष्टिकरण की नीति पर कार्य कर रहे हैं। लखीमपुर घटना के बाद तमाम विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा अपनी तुष्टिकरण की नीति के चलते किसानों को बरगलाने, भ्रमित करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन यह कोशिशें प्रदेश में योगी आदित्यनाथ द्वारा किसान हित में किए गए ज़मीनी कार्यों के आगे बौनी दिखती हैं।

पिछले साढ़े चार वर्षों तक अपने ड्राईंग रूम में बैठकर केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले विपक्ष की इस फुर्ती के बारे में आम राय यही है कि विपक्ष की यह तत्परता केवल राजनीतिक लाभ लेने की होड़ से ज्यादा कुछ नहीं है। प्रदेश के वे लाखों किसान, जिनके खाते में सीधे डीबीटी के माध्यम से योजनाओं का लाभ क्रेडिट हुआ है, वे किसान विपक्ष को 2022 में सत्ता से डेबिट ही करेंगे इसकी संभावना अधिक है।

आगामी चुनावों में विपक्ष का किसानों को बरगलाकर “इनडायरेक्ट बेनिफिट” लेने का मंसूबा पूरा होता नहीं दिख रहा। उत्तर प्रदेश का किसान अब छला हुआ महसूस नहीं कर रहा क्योंकि उन्हें सिर्फ वोट बैंक नहीं माना गया बल्कि उन्हें अर्थव्यवस्था की धुरी मान कर उनके विकास के लिए भागीरथी प्रयास किया जा रहा है और यह कार्य निरंतर जारी है। आज उत्तर प्रदेश का अन्नदाता संतुष्ट है।

डॉ महेंद्र कुमार सिंह राजनीतिक विश्लेषक एवं स्तंभकार हैं।