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धार्मिक स्थल बने ईरान और दक्षिण कोरिया में कोरोनावायरस के फैलाव का कारण

चीन के बाद कोरोनावायरस सबसे अधिक ईरान और दक्षिण कोरिया में फैला है और संयोगवश दोनों ही देशों में इसके फैलाव का केंद्र धार्मिक स्थल रहे।

दक्षिण कोरिया में संक्रमण से प्रभावित लोगों की संख्या 4,212 और मरने वालों की संख्या 22 पहुँच गई है। इसके साथ ही शिन्चिओंजी चर्च ऑफ जीसस के नेताओं पर सरकारी अधिकारी हत्या की जाँच की माँग कर रहे हैं।

अधिकारियों का दावा है कि चर्च ने बीमारी को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों में सहयोग करने से मना कर दिया और इसलिए चर्च को इस फैलाव का ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

कोरिया के रोग नियंत्रण केंद्र का कहना है कि शिन्चिओंजी की रूढ़िवादी परंपराओं के कारण बीमारी फैली है। धार्मिक स्थल पर सदस्यों को एक-दूसरे के करीब घुटनों पर बैठाया जाता है और न ही मास्क पहनने की अनुमति होती है।

शिन्चिओंजी चर्च के 2.6 लाख अनुयायियों की जाँच की जा रही है और कहा जा रहा है संक्रमितों में से आधे ये अनुयायी ही हैं। इस चर्च की चीन के वुहान में भी एक शाखा है और चर्च ने वहाँ से लोगों को धार्मिक प्रचार कार्य के लिए दक्षिण कोरिया बुलाया था।

इन सबमें एक सुपर-स्प्रेडर (बड़ी संख्या में लोगों को बीमारी देने वाली) 61 वर्षीय महिला की पहचान भी हुई है। उन्हें अब क्रेज़ी अजुम्मा (पागल आंटी) कहा जा रहा है क्योंकि लक्षण दिखने के बावजूद उन्होंने दो बार कोरोनावायरस की जाँच करवाने से मना कर दिया और इस बीच दो बार चर्च भी गईं।

वहीं दूसरी ओर ईरान में अभी तक 54 लोगों की मौत हो चुकी है और 978 लोगों के संक्रमण की बात कही जा रही है। मृत्यु दर भी सबसे अधिक ईरान में ही है। ईरान में चिंता की एक और बात है कि कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी इससे संक्रमित हुए हैं।

द न्यूयॉर्कर  की रिपोर्ट के अनुसार तेहरान से दो घंटे दूर शिया धर्म के पारंपरिक शहर कौम से बीमारी का फैलाव शुरू हुआ। इस शहर में पहली दो मौतें 19 फरवरी को हुई थीं और माना जा रहा है कि वुहान से कौम आए व्यापारियों के साथ यह बीमारी आई।

इसके बावजूद सार्वजनिक स्थलों को बंद करने की बजाय कौम धार्मिक स्थल के प्रमुख ने श्रद्धालुओं को आते रहने के लिए कहा। “यह धार्मिक स्थल घावों को भरने के लिए है। यहाँ आकर आप आध्यात्मिक और शारीरिक बीमारियों से उबर पाएँगे।”, मोहम्मद सईदी ने कहा।

चुनावों के चलते भी सरकार ने कोरोनावायरस के फैलाव को छुपाया अन्यथा इससे मतदान प्रतिशत पर असर पड़ता। स्वास्थ्य विशेषज्ञ राजनीतिक निर्णय को बीमारी के फैलाव को दोष देते हैं।

अब जाकर ईरान में बीमारी को रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 24 प्रांतों में जुम्मे की नमाज़ बंद कर दी गई है। वहीं आर्थिक समस्या से जूझ रहे ईरान में साथ ही काम न रोकने की बात भी कही गई है।