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नेपाल में कम्युनिस्ट सरकार के मंदिर पर नियंत्रण विधेयक के विरोध में प्रदर्शन

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) की सरकार के विधेयक के विरोध में कल (19 जून को) सहस्त्रों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। इस विधेयक में पारंपरिक न्यास-सम इकाइयों, गुथियों पर राज्य के नियंत्रण की बात कही गई है जो स्थानीय मंदिरों में उत्सवों का आयोजन करवाते हैं।

गुथी परंपरा नेवार समुदाय से आई है जो कि काठमांडू के स्थानीय लोग हैं। इस क्षेत्र के अलावा देश के अन्य भागों में भी अप्रैल 2019 को पंजीकृत इस गुथी विधेयक का विरोध किया गया, एएफ़पी  ने रिपोर्ट किया।

“वे हमारी विरासत पर हमला कर रहे हैं। कई पीढ़ियों से गुथी हमारी परंपरा का भाग रहे हैं और हम सरकार को इसे लेने नहीं देंगे।”, कल प्रदर्शन करते हुए नानी मैया महरजन ने कहा। सरकारी विधेयक सभी गुथियों को एक प्राधिकरण के भीतर लाना चाहता है जिससे वर्तमान न्यास प्रमुखों को उनके पद से हटा दिया जाएगा।

हालाँकि नेपाल सरकार ने विधेयक वापस लेने की बात कही है लेकिन धार्मिक मामलों में राज्य के हस्तक्षेप को लेकर लोग अभी भी चिंतित हैं। प्रदर्शनकारी यह जताने के लिए सामने आए कि वे तब तक शांत नहीं होंगे जब तक कि इस विधेयक को समाप्त नहीं कर दिया जाता।

इसी प्रकार भारत में भी हिंदू मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण होने के कारण दुःप्रबंधन के मामले सामने आते रहते हैं। उदाहरण के लिए तमिल नाडू सरकार के हिंदू धार्मिक और दानशील निधि विभाग ने आदेश दिया था कि मंदिर कोष की राशि से उनके कार्यलयों में पानी की आपूर्ति की जाए।