दुनिया
कनाडा आम चुनाव में एक सिख के प्रभावी होने से भारत के रिश्तों पर क्या होगा असर

कनाडा में हुए आम चुनाव के परिणाम आ चुके हैं। 338 सीटों पर हुए मतदान में सत्ताधारी लिबरल पार्टी 157 सीटों पर जीत दर्ज कर फिर से सरकार बनाने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो फिर से प्रधानमंत्री हो सकते हैं।

विपक्षी कंज़रवेटिव पार्टी को इस बार मत प्रतिशत में वृद्धि के साथ-साथ सीटों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सरकार बनाने से वह बहुत दूर है। कंज़रवेटिव पार्टी को इस चुनाव 34 प्रतिशत मत के साथ 121 सीटों पर जीत मिली है, जबकि सत्ताधारी लिबरल पार्टी को 33 प्रतिशत मत से संतोष करना पड़ा है।

इन दोनों प्रमुख दलों के अलावा वामपंथी झुकाव वाली न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) को 24 सीटें और ब्लॉक क्यूबेकॉइस पार्टी को 21 सीटें मिली है। माना जा रहा है कि भारतवंशी सीख जगमीत सिंह की पार्टी एनडीपी नई सरकार में किंगमेकर की भूमिका निभाएगी।

एनडीपी ने सशर्त समर्थन देने की घोषणा की

एनडीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगमीत सिंह ने चुनाव जीतने के बाद पार्टी के लोगों को संबोधित किया। संबोधन के दौरान उन्होंने कहा, “अब ट्रूडो को समझ लेना चाहिए कि उनके पास बहुमत नहीं है और हम सबको मिलकर साथ चलना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “हमारा एजेंडा साफ है। हम इसको लागू करने के शर्त पर ही सरकार में शामिल होंगे।”

जगमीत की पार्टी एनडीपी ने चुनाव से पहले मोबाइल फोन और टेलीकॉम सुविधाओं की राशि में कटौती, छात्रों में मुफ्त शिक्षा देने जैसे कई लाभकारी योजनाओं घोषणा की थी।

ट्रूडो के लिए आसान नहीं था चुनाव

कनाडा के उदारवादी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री पीयर ट्रूडो की सहानुभूति पर सवार होकर चुनाव जीतने वाले जस्टिन ट्रूडो के लिए यह। चुनाव आसान नहीं था।

लोकप्रिय नेता ट्रूडो की सरकार पर कई तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। साथ ही जन आंकाक्षाओं को पूरा नहीं करने के कारण चुनाव प्रचार के दौरान ट्रूडो को कई बार विरोध का सामना करना पड़ा था।

ट्रूडो सरकार कई घोटालों से घिरी हुआ था। सरकार पर सऊदी अरब के साथ संबंध और प्रवासी मामलों में असफल रहने का मुद्दा चुनाव में मुश्किलें खड़ी कर दी थीं, लेकिन ट्रूडो ने इन सबको किनारे कर एक बार फिर से वापसी की है।

19 पंजाबी मूल के नेता संसद पहुँचे

कनाडा में हुए इस बार आम चुनाव में 19 पंजाबी मूल के नेता संसद पहुँचे हैं। इसमें लिबरल पार्टी की ओर से सबसे ज्यादा सांसद हैं। पिछली बार 18 पंजाबी मूल के नेता संसद पहुँचे थे। कनाडा में 2 प्रतिशत आबादी पंजाबियों की है‌।

पिछली बार एक खालिस्तानी नेता को ट्रूडो की सरकार महत्वपूर्ण मंत्रालय भी मिला था। माना जा रहा है कि मंत्रीमंडल में इस बार पिछले साल की तुलना में अधिक पंजाबी होंगे।

खालिस्तानी जगमीत सिंह का देश की सत्ता में वर्चस्व

एनडीपी की सीट इस बार घटी है। पिछली बार पार्टी को 39 सीट मिली थीं, जबकि इस बार 24 सीटों से संतोष करना पड़ेगा। लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि इस बार एनडीपी सत्ता में भागीदार होगी। माना जा रहा है कि एनडीपी के नेता जगमीत सिंह नई सरकार में उप-प्रधानमंत्री हो सकते हैं।

जगमीत सिंह मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं। उनपर कई बार कनाडा में खालिस्तान समर्थित आंदोलनों में शामिल होने का आरोप लगता रहा है। 2012 में इसी कारण से भारत ने सिंह को अमृतसर आने के लिए वीज़ा नहीं दिया था।

नई सरकार में जगमीत सिंह का प्रभाव बढ़ेगा। जगमीत 1985 में सिख खालिस्तानियों को बचाने के लिए हुए एक विमान पर बमबारी के आरोपी हैं। एक वीडियो उनका और वायरल हुआ था, जिनमें वे 2020 में खालिस्तान अलग करने के लिए जनमत संग्रह कराने की बात कर रहे हैं।

पहले से ही रक्षा मंत्री रहे हरपाल सिंह का नाम कथित तौर खालिस्तानी चरमपंथी के साथ संपर्क के कारण विवादों में रहा है, लेकिन अब फिर से अतिवादी वामपंथी जगमीत सिंह के सरकार में शामिल होने से खालिस्तानियों का प्रभाव बढ़ने कै आसार हैं।

माना जा रहा है कि इससे भारत के साथ संबंधों में खटास फिर बढ़ सकती है क्योंकि ट्रूडो स्वयं उनके भारत दौरे पर सिख कट्टरवादी जसपाल अटावल के साथ रात्रिभोज करने पर आलोचना का शिकार हुए थे।

ट्रूडो के लिए यह कार्यकाल आसान नहीं है। अल्पमत में होने के कारण कई विधेयक सरकार पास नहीं करा पाएगी। साथ ही एक समर्थित दल की विचारधारा बिल्कुल उलट है, जिसके कारण कई बार सरकार में मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं।