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सीपेक से ऊपर भारतीय संप्रभुता- चीन की बीआरआई गोष्ठी का बहिष्कार करने के संकेत

बुधवार (20 मार्च) को भारत ने संकेत दिया कि यह चीन के 40 खरब डॉलर के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) की द्वितीय गोष्ठी में भाग नहीं लेगा। इसका कारण बताया जा रहा है कि कोई भी देशी ऐसी परियोजना में भाग नहीं ले सकता जहाँ इसकी चिंताओं पर संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलती हो।

“कोई भी देश ऐसे इनिशिएटिव में भाग नहीं ले सकता जो इसके भूभाग और संप्रभुता से संबंधित मुद्दों को संबोधित न करता हो।”, चीन के अंग्रेज़ी दैनिक ग्लोबल टाइम्स से वार्ता में चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिसरी ने कहा।

बीआरआई चीन द्वारा प्रायोजित एक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है जिसका उद्देश्य व्यापार, ऊर्जा और दूरसंचार के लिए 152 देशों और यूरोप, एशिया, मध्य पूर्व, लेटिन अमेरिका और अफ्रीका के अंतर्राष्ट्रीय संघों में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है।

इससे पहले भी भारत ने 2017 में इस गोष्ठी का बहिष्कार किया था क्योंकि बीआरई का अभिन्न अंग है चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सी-पेक) जो कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुज़रेगा और इससे भारत की संप्रभुता का खंडन होता है।

“बीआरआई पर हमने अपना मत और मुद्र पूर्ण रूप से स्पष्ट रखी है और संबंधिता प्राधिकारियों को भी सूचित किया है। हमारा मानना है कि संयोजक इनिशिएटिव अंतर्राष्ट्रीय मानकों के तहत होने चाहिए जो सुशासन और कानून का सम्मा करें। इस प्रकार के इनिशिएटिव में किसी देश की संप्रभुता, समानता और भूभागी अक्षुण्णता को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।”, राजदूत ने जोड़ा।