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भारत-अफगानिस्तान संबंध पाकिस्तान पर निर्भर नहीं- चाबहार बंदरगाह से निर्यात

क्षेत्रीय संयोजकता को बढ़ावा देने के लिए रविवार (24 फरवरी) को चाबहार के रणनीतिक बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान ने औपचारिक रूप से भारत को सामान निर्यात किया, एनडीटीवी  ने रिपोर्ट किया।

23 टन के सूखे मेवे, वस्त्र, कालीन और अन्य सामानों की 570 टन के पहले माल का उद्घाटन अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पश्चिमी निमोज़ प्रांत में एक समारोह में किया। समारोह में उपस्थित लोगों में अफगानिस्तान में भारतीय राजदूत विनय कुमार शामिल थे। यह माल मुंबई भेजा जाएगा।

अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी जिन्होंने 24 फरवरी को पश्चिमी शहर ज़ारंज में एक विशेष समारोह में भाग लिया था, उन्होंने कहा कि हिंद महासागर पर ईरानी बंदरगाह के माध्यम से निर्यात से “सैकड़ों गाँव और लाखों” अफगान बाहरी दुनिया से जुड़ेंगे।

सभा को संबोधित करते हुए, गनी ने कहा कि चाबहार मार्ग के खुलने के साथ अफगानिस्तान का निर्यात अगले एक वर्ष में 1 बिलियन डॉलक से दोगुना होकर 2 बिलियन डॉलर हो जाएगा।

निम्रोज़ के लिए चाबहार बंदरगाह के महत्त्व के बारे में बताते हुए गनी ने कहा, “आज निम्रोज़ वंचित प्रांत से एक महत्त्वपूर्ण प्रांत में बदल रहा है।” गनी ने संबंधित संस्थानों को निर्देश दिया कि वे निम्रोज़ को तीसरे दर्जे के प्रांत से दूसरे दर्जे के प्रांत में सुधार का काम शुरू करें।अफगानिस्तान अब एक स्थलसीमा का देश नहीं है; यह एशिया का दिल है”, कहते हुए उन्होंने बताया कि उनका देश आयातक से निर्यातक देश में बदल रहा था।

भारतीय दूत ने कहा कि 2017 में काबुल और नई दिल्ली के बीच हवाई गलियारे के शुरू होने के बाद भारत में अफगानिस्तान का निर्यात 40 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने अफगान अर्थव्यवस्था के क्षेत्रीय एकीकरण और मजबूती के लिए चाबहार पोर्ट के महत्त्व पर भी प्रकाश डाला।

2017 में उद्घाटन किया गया था और भारत द्वारा बड़े पैमाने पर निर्मित किया गया था, चाबहार पोर्ट ईरान का एकमात्र समुद्री बंदरगाह है, जो अफगानिस्तान को सीधे समुद्री पहुँच प्रदान करता है और एक प्रमुख आपूर्ति मार्ग के रूप में काम करेगा। भारतईरान संयुक्त उद्यम नई दिल्ली को मध्य एशिया के साथ व्यापार करने के लिए पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान के लिए एक महत्त्वपूर्ण परिवहन लिंक प्रदान करता है।

वर्तमान में अफगानिस्तान के अधिकांश आयात और निर्यात पाकिस्तान से होते हैं। काबुल ने लंबे समय से इस्लामाबाद पर अपनी सीमाओं के भीतर अफगान तालिबान आतंकवादियों को शरण देने का आरोप लगाया है।

पिछले साल फरवरी में ईरान ने कहा कि वह चाबहार के परिचालन नियंत्रण को भारत को 18 महीने के लिए किराये पर देने के लिए सहमत हो गया था। इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड ने चाबहार पोर्ट पर औपचारिक रूप से संचालन किया। जून में सड़क परिवहन, जहाजरानी और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वादा किया है कि भारत 2019 तक बंदरगाह को पूरी तरह से चालू कर देगा।

नवंबर में अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि वह चाबहार बंदरगाह को अफगानिस्तान में इसके महत्त्व की मान्यता में प्रतिबंधों से मुक्त कर रहा था।

अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा था कि मंजूरी में छूट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अफगानिस्तान की आर्थिक वृद्धि और विकास के साथसाथ भारत के साथ अमेरिका की घनिष्ठ साझेदारी को मान्यता प्रदान करने की दक्षिण एशिया रणनीति के अनुरूप है।