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उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे ने 27 माह के भीतर 94.4 प्रतिशत काम पूर्ण किया

उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे कुल मिलाकर 94.4 प्रतिशत की प्रगति पर पहुँच गया है और शेष का निर्माण तेज़ गति से चल रहा है।

मुख्य कैरिजवे में क्लियरिंग एवं ग्रबिंग (सीएंडजी) और मिट्टी का काम पूरा होने पर एक्सप्रेसवे पर ग्रैनुलर सब बेस (जीएसबी) और वेट मिक्स मैकडैम (डब्ल्यूएमएम) का कार्य क्रमशः 99-99 प्रतिशत तक पहुँच गया है।

इसके अतिरिक्त, डेंस बिटुमिनस मैकडैम (डीबीएम) का काम 98 प्रतिशत तक पहुँच गया है और एक्सप्रेसवे पर 881 संरचनाओं में से 868 पूरा हो गई हैं।

296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार पदभार संभालने के कुछ महीने बाद अप्रैल 2017 में प्रस्तावित किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 फरवरी 2020 को एक्सप्रेस-वे के निर्माण की आधारशिला रखी।

कोविड-19 की लहर और भीषण बारिश के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार ने नींव रखने के बाद से 27 महीनों के भीतर 94 प्रतिशत से अधिक काम पूर्ण कर लिया है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर इटावा जिले के गाँव कुदरैल से शुरू होता है और चित्रकूट जिले में भरतकूप के पास समाप्त होता है।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बुंदेलखंड क्षेत्र में विशेष रूप से चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर और जालौन जैसे कम विकसित जिलों में विकास में तेजी लाने के लिए इस एक्सप्रेसवे को लिया है।

यह एक्सप्रेसवे चार लेन (छह लेन तक विस्तार योग्य) का होगा, जिसमें छह लेन चौड़ा ढाँचा होगा।

इसकी निर्माण लागत 7,700 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। इस परियोजना को छह पैकेज में बाँटा गया है। एप्को इंफ्राटेक, अशोका बिल्डकॉन, गावर कंस्ट्रक्शन और दिलीप बिल्डकॉन जैसे विकासकर्ताओं के साथ इसको लेकर अनुबंध किए गए हैं।