समाचार
नगरपालिका द्वारा ठोस कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण 18% से अब 70% हुआ- केंद्र

केंद्र सरकार ने सोमवार (6 दिसंबर) को संसद को सूचित किया कि स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत नगरपालिका ठोस कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण 2014 में 18 प्रतिशत करती थी, जो अब बढ़कर वर्तमान में 70 प्रतिशत हो गया है।

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के राज्यमंत्री कौशल किशोर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, “स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) के प्रयासों से सभी शहरों ने नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) के वैज्ञानिक निपटान का अभ्यास करना शुरू कर दिया है। परिणामस्वरूप, अब तक एमएसडब्ल्यू का वैज्ञानिक प्रसंस्करण 2014 में 18 प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान में 70 प्रतिशत हो गया है।”

उन्होंने आगे कहा कि एसबीएम-यू के अंतर्गत केंद्र सरकार ठोस कचरे के प्रबंधन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण हेतु अतिरिक्त केंद्रीय सहायता (एसीए) प्रदान करती है, जिसके साथ-साथ नगरपालिका ठोस कचरे के प्रसंस्करण, निर्माण व बेकार कचरे के प्रबंधन और सभी पुराने डंपसाइट्स के जैव-उपचार सम्मिलित हैं।

मंत्री ने जानकारी दी, “अब तक एसबीएम-यू के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) घटक के तहत राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों को अपशिष्ट से खाद (डब्ल्यूटीसी) संयंत्र, सामग्री प्रतिलाभ सुविधाएँ (एमआरएफ), अपशिष्ट से ऊर्जा (डब्ल्यूटीई) संयंत्र, सेनेटरी लैंडफिल जैसे कई इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण हेतु 6,375.17 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0, जिसे हाल ही में 1 अक्टूबर 2021 को लॉन्च किया गया था, मिशन अवधि के तहत शहरों को कचरा मुक्त बनाने पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है।