राजनीति
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने क्या-क्या बदला

उत्तर प्रदेश में विभाजनकारी राजनीति करने वाले दलों के सत्तारूढ़ होने से कभी हरित क्रांति का महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर पूरे देश का पेट भरने वाला पश्चिमी उत्तर प्रदेश अपराध का गढ़, हिंदुओं के पलायन की भूमि और किसानों की अनगिनत समस्याओं के केंद्र के रूप में पूरे देश कुख्यात हो गया था। विडंबना देखिए कि पुरुषार्थ और पराक्रम की भूमि की पहचान “पलायन” बन गई थी।

विगत अनेक दशकों से प्रदेश में भ्रष्टाचार, अपराध, जातिवाद, संप्रदायवाद, वंशवाद और तुष्टिकरण के समर्थन में जो राजनीति फल-फूल रही थी, उस अधोगामी राजनीति का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में पूर्णतः पटाक्षेप हुआ और प्रदेश के 24 करोड़ लोगों ने चैन की साँस ली।

सांप्रदायिक ताकतों पर शिकंजा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों से हिंदुओं का पलायन एक बड़ी समस्या बन चुका था। मात्र दो वर्ष में कैराना से करीब 340 हिंदू परिवार पलायन कर गए। सुनियोजित ढंग से इन क्षेत्रों में लूट-पाट, मार-पीट, भूमि पर कब्जा, लड़कियों से छेड़खानी व बलात्कार की घटनाओं को समुदाय विशेष द्वारा अंजाम दिया जाता था, जिससे भयक्रांत होकर बहुसंख्यक समुदाय पलायन को मजबूर था।

तुष्टिकरण की राजनीति से प्रेरित पिछली सरकारों ने इसे खूब पोषित किया लेकिन योगी सरकार ने इस दिशा में सख्ती से कदम उठाते हुए, अपराधिक तत्वों पर शिकंजा कसा। अपराधियों के एनकाउंटर से फैली दहशत व कानून के बुलंद होते इकबाल का ही परिणाम था कि स्थानीय जनों में सरकार के प्रति विश्वास पनपा और पलायन पूरी तरह से थम सका।

मुज्जफरनगर के दंगों की विभीषिका झेल रहे लोगों ने जब सुशासन का स्वाद चखा तब वह ‘भय मुक्त समाज’ का वास्तविक अर्थ समझ सके। दीगर है कि योगी के शासन काल में इस क्षेत्र में क्या पूरे प्रदेश में एक भी जातीय या सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। सीएए विरोध प्रदर्शन के समय दंगाइयों को कैसे नियंत्रित किया गया, यह हम सबने देखा।

गौरतलब है कि योगी ने जब सत्ता की बागडोर संभाली तब ‘लव जिहाद’ का नेटवर्क बड़े ही संगठित ढंग से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संचालित था। योगी सरकार ने यूपी पुलिस का विशेष दल गठित कर ‘लव जिहाद’ और अनुचित धर्मांतरण को उजागर करने के साथ ही इस पर रोक लगाने में भी सफलता प्राप्त की है।

ध्यातव्य है कि ‘लव जिहाद’ को लेकर ‘धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश’ के माध्यम से देश में सर्वप्रथम योगी सरकार ने कानून बनाया, जिसके अंतर्गत दोषी को 1 से 10 वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है।

किसानों के हित में योगी सरकार

अन्नदाता किसान, प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी दोनों की शीर्ष प्राथमिकता में रहा। इसीलिए सत्ता में आने के तुरंत बाद किसानों के हितों को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री योगी ने कई योजनाएँ प्रारंभ की हैं, जिनका प्रत्यक्ष लाभ किसानों को मिल रहा है।

अपनी पहली कैबिनेट में ही योगी सरकार ने प्रदेश के लाखों लघु सीमांत किसानों का कर्ज माफ कर अन्नदाता को राहत देने का कार्य किया। किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 लाख से अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड  योजना से जोड़ने का कदम उठाया है।

केसीसी के तहत किसानों को बीज, सिंचाई, फसल उत्पादन, भूमि की तैयारी, उर्वरकों और अन्य आवश्यकताओं के लिए रियायती दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इससे कृषि क्षेत्र में चल रहे पूँजी संकट का समाधान होगा जो फसलों के उत्पादन और बिक्री को सीधे प्रभावित करता है।

पश्चिमी यूपी में गन्ना किसानों को उनकी फसल के मूल्य का समय पर समुचित भुगतान करने में पिछली सरकारें विफल रहीं जिससे लाखों गन्ना किसान अर्थिक संकट का सामना करने को विवश हुए। विरासत में मिली इस समस्या का निदान निकालते हुए योगी सरकार ने पहली बार किसानों से सीधे क्रय करने और उनका मूल्य सीधे उनके खाते में देने का काम किया।

परिणामस्वरूप योगी सरकार के चार वर्ष में 45.74 लाख गन्ना किसानों को रिकॉर्ड ₹1,42,366 करोड़ से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा चुका है, जबकि पूर्ववर्ती सपा सरकार में गन्ना किसानों को वर्ष 2012 से 2017 तक कुल ₹95,215 करोड़ का भुगतान हुआ था।

कभी अखिलेश सरकार में बंद पड़ी चीनी मिलों को अपने चहेतों को कम दामों पर बेच दिया गया था। किंतु योगी ने बंद पड़ी मिलों का जीर्णोद्धार कराया। वहीं, गन्ना किसानों के हितों की अनदेखी करने वाली चीनी मिलों के प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई का निर्देश भी योगी ने दिया।

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास

उत्तर प्रदेश का पश्चिमी क्षेत्र योगी सरकार द्वारा इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण व विकास की एक नई इबारत लिखने की ओर अग्रसर है। एक मंझे हुए शासक की तरह योगी को यह पता है कि बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर का निवेश से सीधा संबंध है।

ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित जेवर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही अगस्त 2021 में पूर्ण कर ली गई है, तथा निर्माण का कार्य प्रारंभ हो चुका है। यह भारत का सबसे बड़ा (सतह क्षेत्र के अनुसार) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा। योगी सरकार ने ‘फ्लुघफेन ज्यूरिख एजी’ नाम की एक स्विस कंपनी को इसके निर्माण कार्य हेतु अनुबंधित भी कर लिया है।

उत्तर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण का कार्य भी तेजी से चल रहा है और लगभग 93 प्रतिशत भूमि भी अधिग्रहित कर ली है। विदित हो कि गंगा एक्सप्रेसवे भारत के सबसे लंबे (1,020 किमी) एक्सप्रेसवे के रूप में प्रतिष्ठित होगा।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना पश्चिमी यूपी के जनपद मेरठ को पूर्वी यूपी के जनपद प्रयागराज तक जोड़ेगी। यह परियोजना बड़े पैमाने पर निवेश का माध्यम बनने के साथ ही दूर-दराज के क्षेत्रों में निर्बाध संयोजकता और स्थानीय युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर प्रदान करेगी।

इसके साथ ही स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने एक रक्षा निर्माण गलियारे की योजना शुरू की है, जो आगरा, अलीगढ़, झाँसी, कानपुर, लखनऊ और चित्रकूट समेत छह शहरों से गुजरेगा। योगी ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य को तीव्र गति से आगे बढ़ाया और एनएचएआई के सहयोग से उसे पूर्ण करवाकर जनता को समर्पित किया।

विचारणीय है कि वर्ष 2015 में निर्माण कार्य आरंभ होने के बाद भी साल 2017 तक मात्र 15 प्रतिशत कार्य भी पूर्ण नहीं हो सका था, जिसे योगी सरकार ने अप्रैल 2018 तक पूर्ण कर जनता को समर्पित कर दिया। देश का सबसे चौड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग होने के साथ ही यह औद्योगिक व परिवहन दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग साबित हुआ है।

योगी सरकार निवेश के क्षेत्र में भी अव्वल रही है। योगी ने जिस प्रकार निवेश के अनुकूल नीतियों को आकार देने का काम किया है, उसका प्रतिफल है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित कंपनियाँ अब यूपी में अपनी इकाइयाँ स्थापित करने को तैयार हैं।

नोएडा समेत विभिन पश्चिमी क्षेत्रों में मात्र साढ़े चार वर्षों में बढ़े हज़ारों करोड़ के निवेश ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि पिछली सरकारों में भी लोक कल्याण की भावना और दृढ़ इच्छाशक्ति होती तो यह क्षेत्र वर्षों पूर्व ही विकास का पर्याय बन गया होता। योगी सरकार की रहनुमाई में पश्चिमी क्षेत्र में प्रगति के नए युग का सूत्रपात हो चुका है।

डॉ महेंद्र कुमार सिंह वरिष्ठ स्तंभकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं। रत्नेश्वर शाही वरिष्ठ पत्रकार हैं।