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भारत का पहला स्वदेशी विमान वाहक पोत विक्रांत (आईएसी-1) का समुद्री परीक्षण आरंभ

भारत के पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत विक्रांत (आईएसी-1) ने आज (4 अगस्त) अपना समुद्री परीक्षण आरंभ किया। भारतीय नौसेना की ताकत और क्षमताओं में वृद्धि के लिए तैयार इस विमानवाहक पोत को 2022 के मध्य तक पूर्वी नौसेना कमान की सेवा में आईएनएस विक्रांत के रूप में सम्मिलित किया जाएगा।

इसने नवंबर 2020 में अपना परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया था। इसके बाद कई अन्य नौवहन, संचार और परिचालन प्रणालियों का एकीकरण भी किया गया।

विक्रांत (आईएसी-1) के चल रहे समुद्री परीक्षणों का केंद्र बिंदु जहाज की चाल का घटक है, जो यह देखने के लिए है कि पानी में जहाज़ यात्रा कैसी चल रही है। अगर परीक्षण में सब कुछ योजना के अनुसार होता है तो स्वदेशी विमान वाहक पोत 2022 के मध्य तक सक्रिय होने की संभावना है।

करीब 24,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने के कारण इसमें 40,000 टन का विस्थापन होगा। एक बार प्रमाणित होने के बाद 262 मीटर लंबा विमान वाहक पोत भारतीय नौसेना की सबसे शक्तिशाली समुद्री-आधारित संपत्ति होगी।

इसमें 35 से 40 विमान होंगे, जिनमें नौसेना के लड़ाकू विमान, पनडुब्बी रोधी हेलीकॉप्टर और नौसेना के यूएवी भी सम्मिलित होंगे।

राजनाथ सिंह ने गत माह कहा था कि आईएसी में करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है। इसमें प्रमुख हथियार व सेंसर और निर्माण में उपयोग हुआ डिज़ाइन से लेकर स्टील तक है। उन्होंने कहा था कि आईएसी का चालू होना भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर एक उचित उपहार होगा।