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मध्य प्रदेश- बाल आयोग ने आदिवासी लड़कियों के मतांतरण में सम्मिलित ईसाई ट्रस्ट पाया

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष ने दो दिन पूर्व मध्य प्रदेश में एक धार्मिक ट्रस्ट द्वारा संचालित बाल केंद्र का औचक निरीक्षण किया, जिसमें पता चला कि केंद्र आदिवासी नाबालिग लड़कियों के मतांतरण में सम्मिलित था।

आयोग ने कल संबंधित पुलिस प्रमुख और जिला मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर 7 दिनों में कार्रवाई रिपोर्ट की मांग की। अधिकारियों को केंद्र में नामांकित सभी बच्चों को उनके संबंधित परिवारों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।

आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने औचक निरीक्षण का वीडियो ट्विटर पर सार्वजनिक किया। उक्त केंद्र मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के सुल्तानपुर ब्लॉक के इंतखेड़ी गाँव में संचालित है।

डीएम और एसपी को आयोग ने पत्र लिखा, एक धार्मिक ट्रस्ट द्वारा संचालित और बच्चों के रहने वाले केंद्र को न तो सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और ना ही वह आधिकारिक तौर पर बाल आश्रय गृह के रूप में पंजीकृत है।

पत्र में कहा गया, “प्रथम दृष्टया, ऐसा प्रतीत होता कि बच्चों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28 (3) का उल्लंघन करते हुए केंद्र में रखा जा रहा था और धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी।”

आयोग ने अधिकारियों को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम-2015 के तहत केंद्र प्रबंधन के विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा।

वीडियो बयान में कानूनगो ने कहा, “8 मई को निरीक्षण में एनसीपीसीआर टीम ने पाया कि एक ईसाई मिशनरी केंद्र के परिसर में नाबालिग लड़कियों की संख्या 15 से 30 के मध्य होने का अनुमान है।”

आगे कहा, “लड़कियाँ हिंदू आदिवासी हैं लेकिन उन्हें ईसाई धार्मिक ग्रंथ पढ़ाए जा रहे थे। टीम को लड़कियों के बिस्तर में बाइबल की किताबें मिलीं। संकेत मिले हैं कि बच्चों को एक विशिष्ट परियोजना के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा था। बच्चे केंद्र में कैसे पहुँचे, इसके लिए एक स्वतंत्र जाँच की आवश्यकता है।