समाचार
गैर पुरुष से हाथ मिलाने पर मुस्कान खान की मौलवी ने की आलोचना, वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा, जिसमें एक मौलवी मुस्कान खान की इस्लाम का पर्याप्त पालन नहीं करने पर आलोचना कर रहे।

कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में धार्मिक पोशाक पर प्रतिबंध के मध्य बुर्का पहनने के लिए मुस्कान खान को धमकाने का प्रयास कर रही भीड़ के सामने खड़े होने के साहसिक कार्य के लिए उन्होंने ना केवल भारत बल्कि बाहर भी मुस्लिम समूहों से प्रशंसा मिली। तालिबान के प्रवक्ता इनामुल्ला समांगानी ने ट्विटर के जरिए खान की प्रशंसा की थी।

वायरल वीडियो में मौलवी कहते हैं, “मुस्कान का एक और वीडियो आया, जिसमें हैदराबाद का एक 50 वर्षीय व्यक्ति उनकी प्रशंसा कर रहा और उनके अच्छे काम के लिए बधाई दे रहा है। वह उसे शेरनी बता रहा लेकिन जब वह हाथ मिलाने के लिए हाथ बढ़ाता है तो मुस्कान तत्काल अपना हाथ दे देती है।”

मौलवी कहते हैं, “उसने उसके हाथ को छुआ। वह व्यक्ति मुस्कान के कंधे पर हाथ रखता है और उसकी कमर को भी छूता है। लगता है मुस्कानखान  को इससे कोई दिक्कत नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “मुस्कान को अल्लाह का डर है। वह पर्दे में कॉलेज जा रही, जो ठीक है लेकिन उसके पिता ने उसे यह नहीं सिखाया कि गैर-मेहरम (परिवार से बाहर के पुरुषों) के साथ मुसाफ़ा (हाथ मिलाना) स्वीकार्य नहीं। भले ही वह आदमी अपनी जीवन के 50वें पड़ाव में हो फिर भी वह उसके लिए एक गैर-मेहरम है। इसका मतलब है कि पिता ने मुस्कान को शिक्षा दी पर अच्छी परवरिश नहीं दी।”

मौलवी उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के एक सलाफी अलीम शेख अब्दुल गफ्फार सलाफी हाफिजउल्लाह हैं। इस्लाम में सलाफी मुसलमानों की पहली तीन पीढ़ियों के वंशज हैं।

अपने फेसबुक अकाउंट के अनुसार, गफ्फार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से आधुनिक अरबी में पीएचडी डिग्री धारक हैं। वह उत्तर भारत में इस्लामी मुद्दों पर एक प्रमुख वक्ता हैं। उनके यूट्यूब चैनल पर उनके वीडियो हजारों में देखे जाते हैं।

हाल ही में उन्होंने मुस्लिम महिलाओं की तुलना मोबाइल फोन से की थी। उन्होंने कहा था कि जिस तरह लोग महंग मोबाइल फोन का अधिक ध्यान रखते हैं, उसी तरह इस्लाम महिलाओं का अतिरिक्त ध्यान रखता है क्योंकि इस्लाम में महिलाएँ सबसे कीमती प्राणि हैं। हिजाब उनकी रक्षा करता है।