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क्यों धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगने से रोकना हमारे हित में नहीं है

जन प्रतिनिधि अधिनियम 1951 के एक खंड में उल्लेखित है कि कोई भी प्रत्याशी अपनी जाति या धर्म के आधार पर मत नहीं मांग सकता। हालाँकि यह कानून मान्य है लेकिन हमारे वरिष्ठ संपादक अरुष टंडन का मानना है कि लोकतंत्र के लिए यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है।

कारण जानने के लिए यह वीडियो देखें व आपके प्रश्न हमें भेजते रहें editorji@swarajyamag.com पर।