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जे साई दीपक: मंदिरों पर राज्य नियंत्रणों का प्रभाव (देखें विडियो)
जे साई दीपक मंदिरों पर राज्य नियंत्रणों का प्रभाव

जहां मंदिरों को राज्य नियंत्रण से मुक्त करने के प्रयासों को तेजी मिल रही है, वहीं बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें यह बात नहीं पता कि वर्तमान स्थिति हमारे समाज को कैसे प्रभावित कर रही है।

इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट के कानूनी टीम के मेंटोर जे साई दीपक ने एक विडियो के जरिये आठ मिनट में इसको समझाया। उन्होनें कहा कि 1925 के शुरुआत से ही द्रविडवाद के साथ मिलकर आर्यन आक्रमण के सिद्धान्त को नकार दिया गया । यह सब मिशनरियों के समर्थन से शुरू हुआ।

साई दीपक बताते हैं कि राज्य निर्देशित मंदिरों में कैसे चडावा दिया जा रहा है और यह हिंदुओं पर एक कर के समान है। जब तक स्वामी दयानन्द सरस्वती ने 2012 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लिखकर इस मुद्दे पर ध्यान खींचा, तब तक इस ओर किसी ने भी गौर नहीं किया, क्योंकि इसके लिए न्यायपालिका के पास समय की कमी है।

साई दीपक के अनुसार, मंदिरों पर राज्यों के नियंत्रण से भ्रष्टाचार बढ़ा है। हमने देखा है कि कैसे तमिलनाडु में हिन्दू धार्मिक और धर्मार्थ विभागों ने मंदिर की संपत्ति को लूटने के लिए बाहरी तत्वों के साथ मिलीभगत की, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। धर्म निरपेक्ष राज्य सिर्फ मंदिरों को निशाना बनाकर भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहे हैं। यही नहीं, गैर हिंदुओं को मंदिर प्रबंधन में पद हथियाने की अनुमति देकर, हिंसक धर्म परिवर्तन के लिए भी रास्ता खोल रहे हैं। मंदिरों के कार्यक्रमों के अलावा दूसरे उद्देश्यों के लिए मंदिर परिसर को खोलकर बर्बाद किया जा रहा है। जो लोग मंदिर के ऊपर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं उनको बेरोजगार करने पर आमादा हैं । इसमें मुख्य बात यह है कि धर्म निरपेक्ष राज्य की नीति सामूहिक रूप से हिन्दू समाज की जड़ें काटने पर तुली है।