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केदारनाथ को जोड़ने हेतु विश्व के सर्वाधिक लंबे रोपवे के लिए भूमि अधिग्रहण आरंभ

भगवान् शिव के भक्त शीघ्र ही अधिक सुविधा व आराम से और भी कम समय में केदारनाथ मंदिर के दर्शन कर सकेंगे। दरअसल, इस पवित्र हिंदू मंदिर के लिए रोपवे बनाने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है।

केदारनाथ और हेमकुंड साहिब तक रोपवे के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार है।

उत्तराखंड के लोगों को रोजगार और आय प्रदान करने में पर्यटन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 2019 में इस पहाड़ी राज्य ने 3.7 करोड़ घरेलू पर्यटकों का आगमन दर्ज किया था, जो बेहतर संयोजकता प्रदान करने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।

केंद्र सरकार की योजना पूरे राज्य में विशेष रूप से मुख्य पर्यटन स्थलों पर संयोजकता बढ़ाने हेतु रोपवे लाइन बनाने की है।

नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) द्वारा शुरू की गईं कुछ रोपवे परियोजनाएँ हैं, जो सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ, गोविंद घाट-घंगारिया-हेमकुंड, नैनीताल में रानी बाग से हनुमान मंदिर, पंचकोटी-बौराडी (नई टिहरी), मुनस्यारी से खलिया टॉप, ऋषिकेश नीलकंठ और औली से गोर्सन तक हैं।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इन परियोजनाओं में से सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ और गोविंद घाट-घंगारिया-हेमकुंड रोपवे परियोजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया शुरू हो गई है।

सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ रोपवे परियोजना की लंबाई 13 किमी होगी और परियोजना की अनुमानित लागत 985 करोड़ रुपये से अधिक होगी।

समुद्र तल से 11,500 फीट की ऊँचाई पर बनने वाला विश्व का सर्वाधिक लंबा रोपवे रुद्रप्रयाग जिले में तीर्थयात्रियों को भगवान् शिव के मंदिर तक पहुँचने में लगने वाले समय को काफी कम कर देगा। रोपवे से वे 60 मिनट में सोनप्रयाग से केदारनाथ की यात्रा कर सकेंगे।