राजनीति
उत्तर प्रदेश में कैसे दिख रहा है सरकारी परियोजनाओं का प्रभाव

देशहित और जनहित की यदि हम बात करें तो रामराज्य की कल्पना हो, चाहे बापू के सपनों का भारत हो, वह हमेशा से गाँवों में बसता था। इस संदर्भ में गांधी कहा करते थे, “यदि भारत का विकास करना है तो सबसे पहले विकास की अथवा देशहित की शुरुआत गाँव से ही करनी चाहिए।”

ऐसा इसलिए कि हमारा देश गाँवों का देश है। इसीलिए आज भी किसी भी परियोजनाओं की शुरुआत गाँवों से ही होती है। गाँवों में सरकारी परियोजनाओं को सर्वप्रथम लागू करने का कारण है कि, गांधी के ग्राम स्वराज की अवधारण के अनुसार गाँवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने तथा मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने के साथ ही ग्रामवासियों में सच्चरित्रता, सादगी तथा स्वावलंबन की भावना उत्पन्न हो।

गांधी जी ने अपने राष्ट्रीय आंदोलनों, स्वदेशी आंदोलनों, नमक सत्याग्रह आदि के माध्यम से हमेशा जनता की भावनाओं को प्रभावित किया। इसी क्रम में उन्होंने पंचायती राज्य को लोकतंत्र की बुनियादी इकाई माना। इसे सशक्त बनाने के लिए हमेशा ज़ोर दिया। इस तरह की संस्थाओं की स्वतंत्रता और स्वावलंबन के लिए पूर्व की सरकारों ने कई योजनाएँ बनाईं, जैसे-

  1. इंदिरा आवास योजना, 1985
  2. व्यापक फसल बीमा योजना, 1985
  3. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, 2005
  4. राजीव आवास योजना, 2009
  5. राष्ट्रीय कौशल कार्यक्रम, 2010

उपर्युक्त योजनाएँ बनीं किंतु कहते हैं ना ‘हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और।’ यानि इस तरह की सरकारी परियोजनाएँ पूर्व की सरकारों में कागज़ पर तो उतरती रहीं किंतु उनका जीवित रूप कहीं भी देखने को नहीं मिला। अथवा ये परियोजनाएँ केवल सरकारी फाइलों को मोटी करती रहीं।

किंतु वर्तमान सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए, अनेक सरकारी परियोजनाओं को लागू करते हुए जनसाधारण को उससे अवगत भी कराया और उन परियोजनाओं से कैसे लाभान्वित हो उसकें लिए कड़े से कड़े नियम भी बनाएँ। नियम बनाते हुए एक वक्तव्य जारी किया कि- अब गाँवों के विकास कार्यक्रमों में गाँवों के पुरुषों, महिलाओं एवं निर्बल वर्ग के सदस्यों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।

केवल वक्तव्य ही जारी नहीं किया गया, अपितु, उसके तहत विभिन्न योजनाएँ भी चलाई गईं जिसमें ग्रामीण, महिला, वृद्ध, असहाय, अल्पसंख्यक, कृषक आदि वर्गों का ध्यान रखा जाए। जैसे-

  1. केयर्सफॉर चिल्ड्रेन्स
  2. आयुष्मान योजना
  3. उज्ज्वला योजना
  4. ई-1000 परियोजना
  5. मित्रा योजना
  6. स्टार्टअप उन्नति कार्यक्रम
  7. घर-घर राशन
  8. वृद्ध जन पोषण योजना
  9. मिशन इंद्रधनुष योजना
  10. आहार क्रांति मिशन

पूर्व सरकारों की योजनाएँ लुभावनी तो थीं, च्विंगम की तरह, जो मुँह में डालने यानि सुनने पर तो अच्छी लगती थीं किंतु क्रियान्वित होती नहीं दिखती थीं। किंतु वर्तमान सरकार ने ‘जहाँ चाह वहाँ राह’ को सत्य साबित करते हुए समय के साथ कदम से कदम मिलाया और सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए पूर्व योजनाओं को बदलकर जनता के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएँ लागू कीं।

वर्तमान सरकार ने जन समस्या निवारण हेतु प्रभावी व्यवस्था शुरू की, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता से सीधे जुड़ने का निर्णय लिया। फलस्वरूप ‘जनता दर्शन’ योजना की शुरुआत हुई जिसमें प्रदेश के कोने-कोने से आये पीड़ितों की बात सुनी जाती है, और उनकी समस्याओं का निवारण भी यथासंभव किया जाता है।

इसी क्रम में यदि कानून व्यवस्था की बात करें तो पूर्व सरकारों में कानून व्यवस्था चरमराकर, ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ के हाथों में चली गई थी। किंतु वर्तमान सरकार ने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ पर ध्यान देते हुए, कानून व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन किया। कानून व्यवस्था को बेहतर बनाया। अपराधियों को नियंत्रित करने के लिए ऐतिहासिक एवं उल्लेखनीय फैसले लिये गये। ‘मित्र पुलिस’ इसी फैसले का जीता-जागता उदाहरण है।

कहते हैं पहली गुरु माँ होती है बच्चों की। किंतु विडंबना ये रही है कि इस देश की पूर्व में यहाँ बेटियाँ ही सुरक्षित नहीं रहीं, गाहे-बगाहे उनके साथ दुराचार होता ही रहा है, चाहे वह परिवार में चाहे समाज में। किसी ना किसी रूप में वे शिकार होती ही रही हैं। ये कहना गलत नहीं होगा कि पूर्व में नियम-कानून नहीं बने। किंतु सुरक्षा हमेशा दोयम दर्जे की व्यवस्थ्ज्ञा के रूप में ही रही। यही कारण है कि बेटियों के साथ हैवानियत होती ही रही।

वर्तमान सरकार ने लड़कियों की तरफ विशेष ध्यान देते हुए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया और विशेष रूप से उसकी सुरक्षा और पढ़ाई के प्रति उन्हें जागरुक करने के लिए ‘मिशन शक्ति’ जैसा अभियान चलाया। प्रदेश के 1,535 थानों पर ‘महिला हेल्प डेस्क’ की स्थापना की गई। महिला अपराधों में वृद्धि को देखते हुए और उससे संबंधित त्वरित कार्यवाही हेतु ‘218 फास्ट ट्रैक कोर्ट’ गठित किया गया। ये संस्थाएँ मात्र गागजी या मौखिक नहीं है, अपितु ये अपने-अपने क्षेत्र में सफल भी हैं।

महिला के साथ-साथ सरकार ने बाल-विकास पर भी ध्यान दिया। इसके तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत छह वर्ष आयु तक के बच्चों, अतिकुपोषित, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार हेतु सफल प्रयास किया। यदि आँकड़ों पर ध्यान देतो लगभग 1.57 करोड़ से अधिक महिला एवं बच्चे इस योजना के तहत लाभान्वित हुए और आगे भी होंगे।

हमारे देश की विडंबना ये है कि जो बालिकाएँ समाज की आधारशिला हैं, उन्हीं के प्रति लोगों का दृष्टिकोण सही नहीं है। इसी दृष्टिकोण और ऐसी सोच को बदलने के लिए सकरार ने ‘मुख्यमंत्री सुमंगला योजना’ लागू किया। इसके अंतर्गत लाभार्थी को 15,000 रुपये तक की धनराशि से लाभान्वित किया जाता है।

किसी भी देश के विकास की नींव वहाँ की शिक्षा स्तर पर निर्भर करती हैं। इस बात को भी सरकार ने संज्ञान में लिया। इसके तहत वर्तमान सरकार ने ‘डॉ एपीजे अब्दुल कलाम गौरव पथ’ योजना की शुरुआत की। इसमें 10वीं और 12वीं के टॉप20 मेधावी छात्र-छात्राओं के घर से विद्यालय तक के मार्ग को निर्माण एवं मरम्मत कराने जैसे कार्य की शुरुआत की जिससे बच्चों के स्कूल आवागमन में कोई समस्या उत्पन्न न हो।

वर्तमान सरकार ने दूर-दृष्टि का परिचय देते हुए विभिन्न प्रकार की परियोजनाओं की शुरुआत की है, जैसे-

  1. ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ के अन्तर्गत लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, आगरा, अलीगढ़, बरेली, झाँसी, सहारनपुर, मुरादाबाद, वाराणसी चयनित हुए। इन्हें इनके विकास के लिए 3418.63 करोड़ धनराशि निर्गत हुए।
  2. ‘उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट- 2018 का सफल योजना’ देश-विदेश के शीर्ष निवेशकों, उद्योगपतियों द्वारा प्रदेश में विभिन्न उद्योगों की स्थापना के लिए 4.68 लाख करोड़ रूपये के निवेश सम्बन्धी एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित।
  3. अटल नवीकरण एवं शहरी रूपान्तरण मिशन (अमृत) योजना’ के अन्तर्गत लगभग 11,421.66 करोड़ रूपये की परियोजना शुरू कर पेयजल, सीवरेज, एवं पार्कों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया। योजना को सफल बनाते हुए 6.70 लाख घरों को पेयजल तथा 5.47 लाख घरों को सीवरेज की सुविधा मिल चुकी।
  4. वर्तमान सरकार के साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में सिंचाई एवंज ल संसाधन विभाग की 13 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं।
  5. आवागमन की यदि बात करें तो वर्तमान सरकार इस पर विशेष ध्यान देते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया, जिससे पूर्वी क्षेत्रों का विकास समुचित ढंग से हो सके। 340.824 किमी लंबे, 6 लेन चैड़े (08 लेन विस्तारणीय) एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य लगभग 95 प्रतिशत हो चुका है। इसके निर्माण से लखनऊ, अमेठी, बाराबंकी, सुल्तानपुर, फैजाबाद, अम्बेकर नगर, आजमगढ़, मऊ तथा गाजीपुर सीधे तौर पर जुड़ जाएँगे और आवागमन भी आसान हो सकेगा। आवागमन को आसान बनाने हेतु वर्तमान सरकार ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे आदि के निर्माण विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत करवाया।
  6. ‘श्रम एवं सेवायोजन’ विभाग जिसके अन्तर्गत 4000 रू. प्रतिमाह भरण-पोषण एवं शिक्षा हेतु उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का शुभारंभ, इसके अतिरिक्त स्वच्छ भारत मिशन, खेल, युवा कल्याण एवं कौशल विकास, खेलो इंडिया योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, कोविड-19 से बचाव हेतु आयुष रक्षा किट एवं आयुष-64 मेडिसनि का वितरण, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, स्वच्छ शौचालय निर्माण योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मत्स्य उत्पादन योजना आदि अनेकों योजनाएँ वर्तमान सरकार ने लागू किया, जिससे हर घर राशन, हर घर रोजगार देने में सफल रही। वर्तमान सरकार की योजनाओं ने देश की समृद्धि व विकास में चार चाँद लगा दिया।

डॉ कुँवर पुष्पेंद्र प्रताप सिंह काशी क्षेत्र में भाजपा के सोशल मीडिया क्षेत्र संयोजक हैं।