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उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे ने मई में लक्षित टोल का सिर्फ 45 प्रतिशत संग्रह किया

उत्तर प्रदेश में 341 किमी लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जो राज्य की राजधानी लखनऊ को आजमगढ़ के माध्यम से पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ता है, को शुरुआती परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अनुमानित यातायात का आधा भी आकर्षित नहीं कर पा रहा है।

टोलिंग एजेंसी प्रकाश एस्फाल्टिंग्स एंड टोल हाईवे (इंडिया) लिमिटेड ने लक्षित टोल के केवल 45 प्रतिशत संग्रह का हवाला देते हुए अनुबंध तोड़ दिया है।

1 से 26 मई के मध्य एजेंसी ने 17 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 7.5 करोड़ रुपये से कम का संग्रह किया है।

न्यूज़-18 ने उप्र एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की हालिया बोर्ड बैठक का हवाला दिया, जिसमें कम टोल संग्रह के तीन कारण सूचीबद्ध किए गए।

पहला लखनऊ आउटर रिंग रोड का पूरा न होना, दूसरा बक्सर बिहार में गंगा पर अधूरा पुल और तीसरा भारी वाहनों का टोल। ये तीन कारण नए एक्सप्रेसवे का उपयोग करने से यातायात को सीमित कर रहे हैं।

यूपीडा के अनुसार, एनएचएआई ने जानकारी दी है कि लखनऊ रिंग रोड और बक्सर के पास पुल दिसंबर 2022 तक तैयार हो जाएगा।

साथ ही यूपीडा भारी वाहनों पर टोल की कीमत कम करने पर विचार कर रहा है क्योंकि यह राष्ट्रीय राजमार्गों पर एनएचएआई द्वारा लगाए गए टोल से लगभग 20 प्रतिशत अधिक है।

नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। यह लखनऊ-सुल्तानपुर रोड (एनएच-731) पर स्थित जिला लखनऊ के गाँव चौदसराय से शुरू होता है और यूपी-बिहार सीमा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31 पर स्थित गाँव हैदरिया पर समाप्त होता है।

22,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से, विशेष रूप से लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, अयोध्या, सुल्तानपुर, आंबेडकर नगर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर जिलों को लाभान्वित करेगा।