राजनीति
उत्तर प्रदेश के लिए क्यों उपयोगी हैं योगी, जानें एक ‘यूपीवाले’ की दृष्टि से
सी फारर - 25th January 2022

राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर ध्यान हो कि देश के कई राज्यों में लोकतांत्रिक कर्त्तव्य के निर्वहन का समय आ गया है। चुनाव न सिर्फ लोकतंत्र का त्यौहार होते हैं, बल्कि परीक्षा भी हैं- समाज की सामूहिक बुद्धिमत्ता की परीक्षा।

एक ‘यूपीवाला’ होने के नाते मैं इस चुनाव में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हूँ जो मार्च 2022 से मार्च 2027 तक मेरे प्रदेश के भाग्य का निर्णय करेगा। पिछले चुनाव में हमने बिना ‘मुख्यमंत्री चेहरे’ के मतदान किया और प्रधानमंत्री मोदी पर भरोसा रखते हुए भाजपा को प्रचंड बहुमत से जिताया।

सौभाग्यवश इस बार हमें केवल मोदी के नेतृत्व पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, क्योंकि उनके द्वारा नियुक्त विश्वसनीय मुख्यमंत्री पद प्रत्याशी अपना 2017 से 2022 तक का कार्यकाल शानदार प्रदर्शन के साथ निकाल चुके हैं।

अब समय आ गया है कि योगी आदित्यनाथ को केवल उनके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए प्राप्त किए गए लक्ष्यों के आधार पर पुनर्निर्वाचित किया जाए।

उत्तर प्रदेश के पास हमेशा से सभी संसाधन थे- धन, लोगों की इच्छाशक्ति, मौसम, पानी, उपजाऊ भूमि, राजधानी से निकटता और इसने देश की राजनीति में एक अहम भूमिका निभाई।

किंतु अनजान कारणों से राज्य स्वयं बिना मूलभूत सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, मकान, शौचालय, अच्छी सड़कों, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों तथा इन सबसे बढ़कर उचित कानून व्यवस्था से वंचित रहा।

हमारे पास सदैव से सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी रहे जो प्रख्यात और मुश्किल माने जाने वाले व्यवसायों जैसे सिविल सेवा, चिकित्सा, अभियांत्रिकी और शोध के क्षेत्र में चयनित होते रहे।

प्रदेश युगों से भारत में आध्यात्मिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक केंद्र रहा है। फिर भी हम पिछड़े रहे, अन्य राज्यों द्वारा व्यंग्य के पात्र रहे तथा भ्रष्टाचार एवं गरीबी के पर्याय कहलाए जाते रहे।

क्या किसी ने सोचने की प्रयास किया कि क्या, कहाँ, क्यों, कब और कैसे उत्तर प्रदेश के साथ इतना गलत होता चला गया? संभवतः जब एक बड़ा प्रदेश महाकाय की भांति गमन करता है तो मस्तक को कीचड़ में घिसटती पूंछ का भान नहीं रह जाता।

मेरे विचार से उत्तर प्रदेश की सभी समस्याओं की जड़ (इसमें अचंभित होने जैसा कुछ भी नहीं), इसकी बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था थी। एक कमज़ोर कानून व्यवस्था ‘छोटे गुंडों के समूह’ को जन्म देती है जो स्थानीय स्तर पर उपद्रव और स्थानीय नागरिकों के लिए समस्या पैदा करते हैं।

यह समस्या बढ़कर जिले स्तर तक पहुँचती है और जब तक आप यह समझें कि क्या हो रहा है, तब तक बड़े अपराध संघ स्थापित हो चुके होते हैं। अपराध फले-फूले और उन्होंने हर अच्छी चीज़ पर ग्रहण लगाना शुरू कर दिया, हर जगह भ्रष्टाचार और हिंसा की फफूंद को जन्म दिया।

व्यापारी फिरौती और रंगदारी के लिए परेशान किए जाते, फिर गैरकानूनी तरीके से कमाया यह धन पुलिसवालों और नेताओं के बीच बंटता था, जिससे वे ताजातरीन अपराधिक व्यापार मॉडल को टिकाऊ, मापने योग्य एवं स्थाई बनाते थे।

इतिहास स्पष्ट रूप से दिखाता है कि कई मुख्यमंत्री आए और गए और सभी कानून व्यवस्था की गिरती अवस्था को सुधारने में असफल रहे। प्रदेश सभी उपलब्ध राजनीतिक विकल्पों को पूर्ण बहुमत से चुनने के बाद भी विनाश के पथ पर चलता रहा।

कोई भी अपराधिक शातिरों को नियंत्रित नहीं कर पाता था क्योंकि छोटे या बड़े सभी राजनीतिज्ञ प्रत्यक्ष या परोक्ष किसी-न-किसी रूप में इस तंत्र से लाभान्वित होते थे। फिर सन् 2017 का चुनाव आया।

जनता पहले से दो मुख्य राजनैतिक दलों, बसपा जिसे उसने भारी बहुमत से (2007 में) तथा सपा जिसे 2012 में चुना था, से निराश थी। उत्तर प्रदेश को बद से बदतर की स्थिति में जाते देख प्रदेश के नागरिकों ने मोदी के नेतृत्व में भाजपा को अवसर देने का निर्णय लिया।

हम सभी ने मोदी का नेतृत्व कौशल तीन वर्ष तक भारत और भारत के बाहर देखा था तथा उन्हें भारत के सबसे बड़े राजनेता के तौर पर स्वीकार किया था। एक आशा की किरण उभरी।

उत्तर प्रदेश को विश्वास था कि शायद गुजरात मॉडल जैसा विकास यहाँ भी संभव हो सकता है, और इस प्रकार भाजपा की शानदार जीत हुई। मोदी ने योगी को मुख्यमंत्री संभवतः उनकी सख्त कार्यप्रणाली तथा सांसारिक भौतिकता एवं राजनैतिक कीचड़ से मुक्त छवि के कारण बनाया।

ऐसा लगा वह ‘सीधी बात नो बकवास’ नज़रिए के ‘टास्क मास्टर’ होंगे और शायद उत्तर प्रदेश सुधर जाएगा। योगी ने कानून व्यवस्था सुधारने के लिए चुनिंदा नौकरशाहों एवं पुलिस अफसरों की टास्क फोर्स बनाई।

आपराधिक संघ के कई बड़े नाम या तो गिरफ्तार हुए या फिर प्रदेश छोड़ने पर मजबूर हुए। जब ऊपर हंटर घुमाया गया तो नीचे गली के गुंडे अपने आप लाइन पर आ गए। यूपी ने कानून व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखा।

बाकी सब कुछ अपने आप ढर्रे पर आने लगा क्योंकि कर्मठ लोग हमेशा से जानते थे कि सब कुछ किया जा सकता है। योगी ने अन्य बहुत-सी विकास की परियोजनाएँ पूरी कीं जिन्हें आँख-कान खुले रखने वाले लोग समझ सकते हैं।

भगवा के प्रति द्वेष से भरे हुए मस्तिष्कों से इन कार्यों को स्वीकार नहीं करवाया जा सकता और न ही ऐसा करने की आवश्यकता है। वे इस लेख के पाठक वैसे भी नहीं हैं।

अब 2022 का चुनाव आ गया है और हम सबको समझना होगा कि आज उत्तर प्रदेश जो कुछ भी है, उसे बनाने में क्या कार्य किया गया और साथ ही साथ ये भी कि जो छुटभैया गुंडे जेल नहीं गए थे, वे अपने आपको लो-प्रोफाइल रखकर अपना समय आने की प्रतीक्षा कर रहे थे।

जैसे ही सरकार और मुख्यमंत्री बदले, वैसे ही ये ठग मिनटों में इकट्ठा होकर उस आपराधिक संघ को पुनर्जीवित कर देंगे, क्योंकि तब इन्हें रोकने वाला कोई नहीं होगा।

सोशल मीडिया पर हाल ही में आए अनेक वीडियो में इन तत्वों की पुनः लौटने और आपराधिक तंत्र पर पुनः कब्जा जमाने की इच्छा साफ झलकती है। क्या हम चाहते हैं कि ऐसा हो?

हम अपनी जाति के लिए सरकार चुनेंगे या अपने समाज एवं प्रदेश के लिए? क्या हमारा यह कर्तव्य नहीं कि हम सुनिश्चित करें कि उत्तर प्रदेश जिस राह पर अभी है उससे पथभ्रष्ट न होने पाए? क्या हम ऐसा चाहते हैं?