राजनीति
उत्तर प्रदेश कोविड मॉडल- आजीविका को सुनिश्चित करते हुए रोका गया वायरस का प्रसार
धवल पटेल - 18th October 2021

आईआईटी कानपुर ने उप-निदेशक प्रोफेसर महिंद्रा अग्रवाल के तत्वावधान में एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई है जिसका शीर्षक है यूपी मॉडल- स्ट्रैटेजीज़, टैक्टिस, इम्पैक्ट। सदी की कठिनतम कोविड वैश्विक महामारी से निपटने में वे योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रदर्शन को अपेक्षा से अधिक बताते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने आजीविका की सुनिश्चितता और सतत् आर्थिक गतिविधियों के साथ कोरोनावायरस के अनियंत्रित फैलाव को रोकने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढाँचे के बढ़ाने के विकल्पों को अपनाया।

उत्तर प्रदेश सरकार ने आर्थिक गतिविधियों पर न्यूनतम असर डालते हुए, डाटा-संचालित निर्णय लेते हुए, महामारी के विरुद्ध लड़ाई जारी रखी। सरकार ने टीटीटीटी (टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट, टैकल) की रणनीति बनाई। इस तरह उत्तर प्रदेश ने पूरे देश मे सबसे अधिक 6.6 करोड़ टेस्ट किए।

टेस्टिंग के लिए भी वृहद् रणनीति बनाई गई थी जिसमें सबसे पहले लक्षण दिखाने वालों का परीक्षण किया गया और फिर विराट रूप से उन लोगों का परीक्षण हुआ जो संदिग्ध मामलों के संपर्क में आए थे। इस प्रकार के परीक्षण से नए मामलों में दो गुना कमी आई है।

प्रत्येक ग्राम निगरानी समिति को एक बुनियादी दवा किट दी गई थी, जो किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के बीमार होने पर दी जाती थी। घर-घर जाकर दौरा किया गया ताकि संभावित मामलों की पहचान हो सके। कम गंभीर मामलों के लिए एक स्पष्ट गृह पृथकवास नियम तैयार किया गया था।

शहरों में आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित किए बिना प्रकोप को सीमित करने के लिए माइक्रो-कंटेनमेंट ज़ोन बनाए गए थे। स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन राशि दी गई। उन्हें मानदेय के रूप में वेतन में 25 प्रतिशत की वृद्धि दी गई।

गोरखपुर में कोविड हेल्प डेस्क का निरीक्षण करते योगी आदित्यनाथ

स्वास्थ्य कर्मियों को व्यापक बीमा पैकेज दिया गया। आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देकर जनशक्ति को बढ़ाया गया।  कोविड-बेड की उपलब्धता को लगभग 80,000 तक बढ़ाने के लिए नवीन तरीकों को अपनाया गया।

दूसरी लहर के शिखर समय में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा ऑक्सीजन और ऑक्सीजन ले जाने वाले टैंकरों की उपलब्धता का था। प्रदेश को अप्रैल के उत्तरार्ध में एक बाधा का सामना करना पड़ा, लेकिन फिर से भरने के लिए खाली ऑक्सीजन टैंकरों को एयरलिफ्ट करने जैसे नवीन विचारों के साथ स्थिति को नियंत्रण में लाया गया।

ऑक्सीजन टैंकरों की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड बनाया गया था। आईआईटी कानपुर ने राज्य के अस्पतालों के लिए रीयल-टाइम ऑक्सीजन ऑडिट सिस्टम विकसित किया है। इसके परिणामस्वरूप प्रतिदिन 30+ मीट्रिक टन की बचत हुई।

उत्तर प्रदेश ने दूसरी लहर के दौरान लॉकडाउन और प्रतिबंध लगाने के साथ एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया। सप्ताहांत की आवाजाही और शाम की आवाजाही के लिए सही समय पर प्रतिबंध लगाने से संपर्क दर 0.6 से 0.3 तक कम हो गई।

उत्तर प्रदेश बिना किसी सख्त लॉकडाउन के यह उपलब्धि प्राप्त कर सका, जबकि कई अन्य राज्यों को सख्त, कड़े लॉकडाउन लागू करने पड़े। कोविड अवधि के दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड जैसे राज्यों में प्रवासी श्रमिकों के लौटने का चलन देखा गया।

दूसरे राज्यों में रहकर काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों के वापस आने पर उन्हें न केवल समायोजित करना बल्कि उनके लिए गुणवत्तापूर्ण आजीविका सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती थी। उत्तर प्रदेश ने इस चुनौती को स्वीकार किया और इन प्रवासी श्रमिकों के कौशल मानचित्रण जैसे नवीन विचारों के साथ इसे एक अवसर में बदल दिया।

उत्तर प्रदेश कामगार और श्रमिक आयोग के गठन के बाद 16 जून 2020 को पहली बैठक

संभावित नियोक्ताओं की कौशल आवश्यकताओं का मानचित्रण भी किया गया। राज्य ने महामारी की अवधि के दौरान नए उद्यमों को 2.6 लाख एनओसी जारी किए। स्थानीय स्वशासी निकायों ने संपत्ति निर्माण पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। इससे रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए।

राज्य में बेरोजगारी दर मार्च 2020 में लगभग 10 प्रतिशत से घटकर जून 2021 में लगभग 4 प्रतिशत हो गई, अन्य भारतीय राज्यों जैसे बिहार और दिल्ली के ठीक विपरीत। यह उत्तर प्रदेश था जो पहली लहर के दौरान रेहड़ी-पटरी वालों, रिक्शा चालकों के लिए नकद सहायता पैकेज लेकर आया था ताकि उनके लिए आजीविका सुनिश्चित हो सके।

इसे और आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने दूसरी लहर के दौरान 39 लाख मीट्रिक टन मुफ्त राशन वितरित किया। यह प्रति परिवार 100 किलोग्राम से अधिक के बराबर है। नकद हस्तांतरण 3000 रुपये प्रति परिवार किया गया।

राज्य और देश के सामने कई चुनौतियों प्रस्तुत करने वाली सभी दूसरी लहर के करीब पहुंचने और उसे संभालने के दौरान उत्तर प्रदेश ने राज्य में मेट्रो, एक्सप्रेसवे जैसी बुनियादी ढाँचा विकास परियोजनाओं पर से ध्यान अलग नहीं किया।

साथ ही चालू परियोजनाओं ने राज्य में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार सृजन में निरंतर सहयोग प्रदान किया। तीसरी लहर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। पहली और दूसरी लहर के अनुभव के साथ, जनशक्ति के साथ-साथ स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार किया गया है।

टीकाकरण अभियान ज़ोरों पर है। यदि निकट भविष्य में तीसरी लहर भी आती है, तो प्रभाव, अस्पताल में भर्ती होने वाले रोगियों की संख्या पिछली लहरों की तुलना में कम होगी। हालाँकि, सतर्क रहना और चुनौतियों के लिए तैयार रहना हमेशा बेहतर होता है।

उत्तर प्रदेश कोविड मॉडल महामारी से निपटने में केस स्टडी साबित हुआ है। यह इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे निरंतरता, लीक से हटकर सोच, और वास्तविकताओं के अनुसार रणनीतियों को ढालना परिवर्तन ला सकता है।