राजनीति
उत्तर प्रदेश अपनी प्राचीन संस्कृति के साथ कैसे एक नया राज्य बनकर उभरा है

उत्तर प्रदेश श्रीराम, श्रीकृष्ण, महादेव की नगरी, माँ गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम जैसे अनेक पवित्र स्थानों को समेटे, हिंदू धर्म के सबसे पवित्र माने जाने तीर्थों की भूमि है। अपार संसाधनों एवं क्षमताओं से परिपूर्ण यह प्रदेश भारतवर्ष का सबसे संभावनायुक्त प्रदेश माना जाता है।

लेकिन लंबे समय तक राजनीति के विकृत स्वरूप अर्थात् कुशासन और राजनैतिक हिंसा के शिकार होने के कारण यह प्रदेश अपनी मूल ख्याति और पहचान से इतर एक पृथक रूप में दृष्टिगत हो रहा था।

देश में एक आम धारणा बन गई थी कि उत्तर प्रदेश गुंडागर्दी, लूट-पात, दंगे, जात-पात, यौन अपराध,अनियोजित विकास, बेरोजगारी जैसी अनेक व्याधियों से युक्त एक बीमारू राज्य हो गया है।

लेकिन जैसा कहा जाता ही है, हर रात के बाद उजाले की किरण ज़रूर आती है और जिस प्रदेश को श्रीराम और श्रीकृष्ण ने स्वयं जन्मस्थल के रूप में चयनित किया हो, वह कलंक के कलुषित तमस में कितने समय तक रह सकता है।

यूपी के लिए वर्ष 2017 एक दीपावली से कम नहीं था। जब एक लोक कल्याणकारी शासन ने इस प्रदेश की बागडोर संभाली और ऊपर आरोपित सभी कलंकों को मिटाते हुए एक नए परिवेश का उदय कराया। ऐसा परिवेश जिसे महसूस कर लोगों को रामराज्य के सुशासन की अनुभूति हो सके।

बीते पाँच वर्षों के अल्प समय में ही “साफ नियत और नेक इरादे” से किए गए सत्प्रयासों का परिणाम है, कि आज इस प्रदेश ने हर उस कीर्तिमान को प्राप्त किया जिसका दंभ अन्य विकसित राज्य भरते थे। हर क्षेत्र में इस प्रदेश ने नई परिभाषा लिखी है।

आधारभूत संरचनाएँ, पर्यटन, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता, महिलाओं का समावेशन एवं निवेशकों के लिए मनचाहा वातावरण, हर क्षेत्र मे अभूतपूर्व कार्यों से नए उत्तर प्रदेश की पटकथा लिखनी शुरू हुई।

नया उत्तर प्रदेश

कोई भी प्रदेश यूँ ही नए स्वरूप में नहीं आता। इसके लिए मजबूत प्रशासन, अच्छी नीतियाँ, साहसिक निर्णय लेने वाले नेतृत्व की आवश्यकता होती है। उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार इन सभी वैशिष्ट्यों से परिपूर्ण है। आज उत्तर प्रदेश को ऐसे ही नए उत्तर प्रदेश की संज्ञा नहीं दी जा रही है। उसके लिए अनेक ऐतिहासिक कार्य किए गए है.-

  • महाकुंभ – लोक व आस्था से जुड़े इस प्रायोजन को विश्वस्तरीय मानकों से संपन्न कराकर एक नई पहचान दिलाना
  • श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण
  • महादेव की नगरी काशी व बाबा विश्वनाथ मंदिर का कायाकल्प
  • भव्य दीपोत्सव व रंगोत्सव का आयोजन
  • तीन नए राज्य विश्वविद्यालय व 51 राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना
  • विकास के पहिये को गति देने हेतु चार एक्सप्रेसवे का निर्माण
  • मेट्रो परियोजना
  • बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ व चिकित्सकीय शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु 30 मेडिकल कालेज
  • 23 एयरपोर्ट – (10 संचालित, 13 कार्य प्रगति पर)
  • 30,000 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था
  • कोरोना काल मे बेहतरीन प्रबंधन
  • ग्रामीण अंचल तक ऑप्टिकल फाइबर कनेक्शन

यह नए उत्तर प्रदेश के वातावरण का ही कमाल है कि आज निवेशकों की पहली पसंद यूपी बना है, बेहद ही कम समय में ईज़ ऑफ डुइंग बिजनेस की राष्ट्रीय स्थान 12वें को दूसरे स्थान पर परिवर्तित किया। यही नहीं आज लगभग 22 लाख करोड़ की जीडीपी के साथ देश में दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य है उत्तर प्रदेश।

सैमसंग जैसी नामी संस्था ने भी इसी प्रदेश में अपनी सबसे बड़े उत्पादन संयंत्र को स्थापित किया। ऐसे अनगिनत कार्य हुए हैं नए उत्तर प्रदेश के निर्माण हेतु।

नया अनुभव एवं नई उम्मीदें–

स्वप्रदेश प्रगति करे यह हर प्रदेशवासी के लिए गर्व का विषय होता है, इससे केवल प्रदेश का ही नाम नहीं आगे बढ़ता, वहाँ रहने वाले निवासियों के जीवन मे भी काफी सकारात्मक सुधार आते हैं, अन्य प्रदेशों-देशों मे निवास कर रहे प्रवासियों के लिए भी गर्व का विषय बनता है।

इस सकारात्मकता के माहौल के कारण सभी वर्ग, चाहे वे वृद्ध हों, वयस्क हों या युवा स्वयं के लिए इस नए प्रदेश में नया अवसर देख रहे हैं। सरकार के सहयोग से आज प्रदेश में नामचीन कंपनियों के कारखाने व अन्य इकाइयों की स्थापना हो रही है।

ऐसे अमृत प्रयासों से प्रदेश के युवाओं को पुनः आशा की एक नई किरण दिखी है कि उन्हें अब उनके प्रदेश में रोजगार प्राप्त होगा। अन्य प्रदेशों में कार्यरत वयस्क भी गृह प्रदेश मे अपने लिए मौके तलाश रहे हैं।

कोरोना प्रथम व द्वितीय कालखंड के दौरान बहुतायत संख्या में प्रदेश लौटे लोगों के सामने अपने व परिवार के भरन-पोषण (आजीविका) चलाने हेतु एक बड़ी समस्या खड़ी हुई। जब स्थिति विकराल हो सरकार से भी काफी उम्मीदें भी स्वाभाविक हो जाती हैं।

इस वर्ग को भी ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने उनके उम्मीदों के अनुसार निर्णय लिए, जो कि बेहद कारगर सिद्ध हुए और 40 लाख से अधिक श्रमिकों व कारीगरों को उनके गृहस्थान में रोजगार प्राप्त हुआ जिसकी चतुर्दिक प्रशंसा हुई।

स्थानीय उत्पादनों के प्रोत्साहन एवं उन्हें विश्वस्तरीय पहचान दिलाने के लिए ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना की शुरुआत भी काफी कारगर रही है। इससे देश व दुनिया से उत्तर प्रदेश के विशिष्ट शिल्प कलाओं एवं उत्पादों का परिचय तो हुआ ही साथ ही इसके तहत 25 लाख से ज्यादा लोगों को लिए  रोजगार के अवसर का भी सृजन हुआ।

यूपी की बेटियों में भी उम्मीदों का नया पंख लगा है। सरकार ने महिलाओं के सम्मान व सशक्तिकरण हेतु पुरजोर प्रयास किए हैं जिसका परिणाम है सभी क्षेत्रों मे उनकी भागीदारी में काफी वृद्धि हुई है।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत लगभग 2 करोड़ बेटियाँ लाभान्वित हुई हैं, पुलिस विभाग मे 20 प्रतिशत आरक्षण के बाद हर जनपद से बेटियों ने इस कैरियर को भी चुना है, यह अपने आप मे एक बड़ी उपलब्धि हम सभी के सामने आया है।

ऐसे अनेक अनुभव के माध्यम से प्रदेश की जनता मे वर्तमान सरकार से उम्मीदों की ज्योति जगी है। उत्तर प्रदेश लंबे समय तक शासकीय रूढ़िवाद से ग्रस्त रहा है। जनाकांक्षा और भविष्य के उत्तरदायित्वों की उपेक्षा कर इसे कुशासन के भँवर में बलात डालने का प्रयास पूर्ववर्ती शासन में हुआ था।

नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ ने इस बड़े प्रदेश की तमाम जटिलताओं के बावजूद जिस प्रकार प्रदेश को प्रगति और सुशासन का नया पथ प्रदान किया है वह निःसंदेह उत्तम प्रदेश का ही मार्ग है। अगर इसी सशक्त और राजनीतिक निष्कामता के साथ प्रदेश आगे बढ़ा तो वह दिन दूर नही कि यह प्रदेश भारत मे विकास का नया मॉडल एवं दृष्टिकोण स्थापित करेगा।

श्रेयश सिंह वाराणसी के निवासी हैं व वर्तमान में दार्जीलिंग सांसद के सहयोगी के रूप में कार्यरत हैं।