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यूपीआई की भारत में खुदरा भुगतान में लगभग 10 प्रतिशत की भागीदारी- मैक्वेरी रिपोर्ट

मैक्वेरी शोध की एक रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की अब खुदरा भुगतान में भागीदारी लगभग 10 प्रतिशत है। इसने 400 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से वित्तीय वर्षों 2017-2021 में प्रगति की है।

मैक्वेरी ने अपने अध्ययन के लिए वास्तविक समय सकल निपटान (आरटीजीएस) के अलावा सभी भुगतानों को खुदरा भुगतान माना। वित्तीय वर्ष 2021 में यूपीआई के माध्यम से भुगतान का मूल्य 41 लाख करोड़ रुपये था, जो बिक्री केंद्र टर्मिनलों पर क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान का लगभग 2.8 गुना था।

ब्लूमबर्ग क्विन्ट ने मैक्वायर रिपोर्ट के निष्कर्षों के हवाले से बताया, “खुदरा भुगतान (मूल्य के अनुसार) वित्तीय वर्ष 2015-2021 में 18 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ा। वित्तीय वर्ष 2017 से 2021 में यूपीआई 400 प्रतिशत के सीएजीआर से अधिक से बढ़ा। अब यह कुल खुदरा भुगतान का 10 प्रतिशत हो गया है (आरटीजीएस को छोड़कर), जो कुछ वर्ष पहले 2 प्रतिशत था।”

इसके अतिरिक्त, मात्रा के हिसाब से कुल यूपीआई लेन-देन का 45 प्रतिशत अब भी पीयर-टू-पीयर स्थानांतरित और छोटी खरीद है, जबकि कार्ड का उपयोग उच्च आकार वाले लेन-देन के लिए किया जाता है।

इस संबंध में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के प्रभाव का आकलन किया जा सकता है क्योंकि 20 अप्रैल के बाद से यूपीआई के माध्यम से औसत मासिक लेन-देन मूल्यों में चार गुना से अधिक का सुधार हुआ है।