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केंद्र ने 30,000 मेगावॉट से अधिक की क्षमता वाली 79 जल विद्युत परियोजनाएँ बनाईं

केंद्र सरकार ने 500 गीगावॉट की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता तक पहुँचने और 2030 तक देश की 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताओं को अक्षय ऊर्जा (आरई) से पूरा करने की भारत की प्रतिबद्धता के हिस्से के रूप में 30,000 मेगावॉट से अधिक की कुल क्षमता वाली 79 जल विद्युत योजनाओं के निर्माण की योजना बनाई है।

इन 79 जल विद्युत परियोजनाओं में 8,700 मेगावॉट की 11 पंप भंडारण योजनाएँ सम्मिलित हैं और 12,663 मेगावॉट की जल विद्युत परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त, इनमें 1,023 मेगावॉट की क्षमता वाली पाँच जलविद्युत योजनाएँ सम्मिलित हैं, जिन्हें चालू किया गया है।

गुरुवार (9 दिसंबर) को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने दी।

अन्य ऊर्जा स्रोतों के बारे में डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि नेट-जीरो इकोनॉमी को पूरा करने के लिए राष्ट्र के ऊर्जा संक्रमण में परमाणु ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि देश की वर्तमान में स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता 6,780 मेगावॉट है। परमाणु ऊर्जा स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल है। इसके साथ यह थर्मल पावर की तरह चौबीसों घंटे उपलब्ध लगातार एक क्षमता में विद्युत आपूर्ति करने वाली भी है।

उन्होंने कहा, “निर्माणाधीन परियोजनाओं के प्रगतिशील समापन और स्वीकृत होने पर 6,780 मेगावॉट की मौजूदा परमाणु ऊर्जा क्षमता को वर्ष 2031 तक बढ़ाकर 22,480 मेगावॉट किया जा रहा है। भविष्य में और अधिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की भी योजना है। इसी तरह कुल 31,665 मेगावॉट कोयला आधारित क्षमता निर्माण के विभिन्न चरणों में है।”