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हरित हाइड्रोजन, अमोनिया विनिर्माण को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रीय हाइड्रोजन नीति अधिसूचित

ऊर्जा मंत्रालय ने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने और भारत को हरित हाइड्रोजन हब बनाने हेतु हरित हाइड्रोजन-हरित अमोनिया नीति को अधिसूचित किया। यह राष्ट्रीय हाइड्रोजन अभियान को आगे बढ़ाती है, जिसे प्रधानमंत्री ने 75वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2021) पर लॉन्च किया था।

राष्ट्रीय हाइड्रोजन अभियान का लक्ष्य 2030 तक 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन और अक्षय ऊर्जा क्षमता के संबंधित विकास को सुविधाजनक बनाना है।

जीवाश्म ईंधन को बदलने हेतु हाइड्रोजन और अमोनिया को भविष्य के ईंधन के रूप में परिकल्पित किया गया। अक्षय ऊर्जा से ऊर्जा का उपयोग करके इन ईंधनों का उत्पादन, जिसे हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया कहा जाता है, राष्ट्र की पर्यावरण की दृष्टि से स्थायी ऊर्जा सुरक्षा की प्रमुख आवश्यकताओं में से एक है।

नीति के हिस्से के रूप में हरित हाइड्रोजन-अमोनिया निर्माता कहीं भी पावर विनिमय से अक्षय ऊर्जा खरीद सकते हैं या स्वयं या किसी अन्य विकासकर्ता के माध्यम से अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित कर सकते हैं।

नीति आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों में खुली पहुँच प्रदान करने का आदेश देती है। हरित हाइड्रोजन-अमोनिया का निर्माता अपनी बिना खपत वाली अक्षय ऊर्जा 30 दिनों तक वितरण कंपनी के पास जमा कर सकता और आवश्यकता पड़ने पर वापस ले सकता है।

वितरण लाइसेंसधारी अपने राज्यों में हरित हाइड्रोजन-अमोनिया के निर्माताओं को रियायती कीमतों पर अक्षय ऊर्जा की खरीद और आपूर्ति कर सकते हैं, जिसमें केवल खरीद की लागत, लाने का शुल्क और राज्य आयोग द्वारा निर्धारित एक छोटा सा लाभ सम्मिलित होगा।

यह नीति 30 जून 2025 से पहले शुरू की गई सभी परियोजनाओं के लिए इसके निर्माताओं को 25 वर्ष की अवधि के लिए अंतर-राज्यीय संचरण शुल्क माफ करने का प्रावधान करती है।

किसी भी प्रक्रियात्मक देरी से बचने के लिए निर्माताओं और अक्षय ऊर्जा संयंत्र को ग्रिड संयोजकता प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी।