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चीन के नए भूमि सीमा कानून की भारत ने की आलोचना, “द्विपक्षीय समझौते होंगे प्रभावित”

भारत ने बुधवार (27 अक्टूबर) को एक नया भूमि सीमा कानून लाने के एकतरफा निर्णय के लिए चीन पर निशाना साधा और कहा कि यह चिंता का विषय है क्योंकि कानून का सीमा प्रबंधन और समग्र सीमा प्रश्न का मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों पर प्रभाव पड़ सकता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत को अपेक्षा है कि चीन उस कानून के बहाने कार्रवाई करने से बच जाएगा, जो भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति को एकतरफा परिवर्तित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के एकतरफा कदम का उन व्यवस्थाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जिन पर दोनों पक्ष पहले ही पहुँच चुके हैं- चाहे वह सीमा प्रश्न पर हो या एलएसी पर शांति बनाए रखने के लिए।

गत सप्ताह चीन की राष्ट्रीय व्यवस्थापिका ने भूमि सीमा क्षेत्रों के संरक्षण और शोषण पर नया कानून अपनाया, जिसका भारत के साथ बीजिंग के सीमा विवाद पर असर पड़ सकता है।

बागची ने कहा, “चीन का एकतरफा निर्णय एक कानून लाने के लिए, जो सीमा प्रबंधन के साथ सीमा प्रश्न पर हमारी मौजूदा द्विपक्षीय व्यवस्था पर प्रभाव डाल सकता है, हमारे लिए चिंता का विषय है।”

समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने पिछले सप्ताह रिपोर्ट दी थी कि अगले वर्ष 1 जनवरी से लागू होने वाला कानून यह निर्धारित करता है कि चीन के जनवादी गणराज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पवित्र और अहिंसक हैं।

बागची ने कहा, “हमने देखा कि पड़ोसी देश ने 23 अक्टूबर को एक नया भूमि सीमा कानून पारित किया। कानून अन्य बातों के अलावा बताता है कि चीन भूमि सीमा मामलों पर संधियों का पालन करता है या संयुक्त रूप से विदेशी देशों द्वारा स्वीकार किया जाता है।” उन्होंने कहा कि कानून में सीमावर्ती क्षेत्रों में जिलों के पुनर्गठन के प्रावधान भी हैं।