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सेंटिनली जनजाति के धर्मांतरण की साज़िश में अकेला नहीं था अमरीकी मिशनरी

अमरीकी मिशनरी जॉन एलेन चाऊ की मौत की जाँच में एक नया मोड़ आया है। कथित तौर पर अंडमान द्वीपों पर वह सेंटिनली जनजाति द्वारा मारा गया था। सूत्रों से पता चला है कि ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिससे लगता है कि चाऊ सेंटिनली जनजाति के धर्मांतरण की साज़िश में शामिल था, हिंदुस्तान टाइम्स  ने रिपोर्ट किया। पुलिस ने पता लगाया है कि इस ट्रिप पर आने से पहले चाऊ दो अमरीकी नागरिकों से अंडमान के ‘सेफ हाउस’ में मिला था।

इन दो अमरीकियों में एक 53-वर्षीय महिला टेनेसी और 25-वर्षीय युवक कोलोरैडो है। उन्होंने 5 से 10 नवंबर तक एक स्थानीय ईसाई एलेक्ज़ेंडर के सेफ हाउस में चाऊ के साथ कई बैठकें की थीं, पुलिस अधिकारियों ने बताया।

यह सूचना चाऊ के जर्नल में से मिली जिसमें उसने लिखा था कि सेंटिलनियों से संपर्क स्थापित करने के एक विफल प्रयास के बाद वह एक हफ्ते तक सेफ हाउस में छिपा रहा था और सेंटिनलियों से मिलने के अगले अवसर की प्रतीक्षा कर रहा था। एलेक्ज़ेंडर से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने इस सूचना को सत्यापित किया।

जिस मछुआरे ने चाऊ को उत्तर सेंटिनल टापू पार करने में सहायता की थी, पुलिस उसके इरादों पर भी संदेह कर रही है और कहा कि लगता नहीं कि इस कार्य की प्रेरणा मात्र आर्थिक लाभ थी। मछुआरे ने दावा किया है कि इस प्रतिबंधित टापू पर चाऊ को ले जाने के लिए उसे 25,000 रुपए मिले थे लेकिन चाऊ के लेखों से संकेत मिला है कि उसके कृत्य धार्मिक विश्वासों से प्रेरित थे।