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प्रधानमंत्री मोदी ग्लासगो में बोले, “2070 तक कार्बन उत्सर्जन शून्य पर ले आएगा भारत”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (1 नवंबर) को एक साहसिक प्रतिज्ञा की घोषणा की कि भारत 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करेगा। साथ ही बल देकर कहा कि यह एकमात्र देश है, जो पेरिस समझौते के तहत जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रतिबद्धताओं को उसकी भावना के तहत अक्षरशः पूरा करने के लिए परिश्रम कर रहा है।

ग्लासगो में चल रहे संयुक्त राष्ट्र कॉप26 में राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के लिए उच्च स्तरीय खंड में विश्व के नेताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए कड़ा परिश्रम कर रहा है और इसके परिणाम दिखने लगेंगे।

मोदी ने यह भी कहा कि भारत ने जलवायु परिवर्तन को अपनी नीतियों को केंद्र में रख रहा है। उन्होंने अगली पीढ़ी को मुद्दों से अवगत करवाने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में जलवायु अनुकूलन नीतियों को सम्मिलित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

शिखर सम्मेलन में देश के राष्ट्रीय वक्तव्य को प्रस्तुत करते हुए उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की पाँच प्रतिबद्धताओं को एक साहसिक घोषणा के साथ सूचीबद्ध किया कि यह वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करेगा।

उन्होंने 450 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावॉट तक प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को भी बढ़ाया।

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर 500 गीगावॉट करेगा। 2030 तक अक्षय ऊर्जा स्रोतों से अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50 प्रतिशत पूरा करेगा। अभी और 2030 के मध्य भारत अपने कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में 1 अरब टन की कमी करेगा। भारत अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता को 45 प्रतिशत तक घटाएगा और भारत 2070 तक शुद्ध शून्य लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा।”