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तुर्की में मुद्रा संकट के मध्य वार्षिक मुद्रास्फीति 36% बढ़ी, वर्ष 2002 के बाद हुई सर्वाधिक

तुर्की की वार्षिक मुद्रास्फीति दर बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई, जो सितंबर 2002 के बाद सबसे अधिक है। आधिकारिक आँकड़ों से ये जानकारी सामने आई।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की सांख्यिकी संस्थान ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में गत माह की तुलना में दिसंबर में 13.58 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे लोगों की खरीदने की शक्ति कम हुई। आँकड़ों से जानकारी मिलती है कि खाद्य मूल्यों में वार्षिक वृद्धि 43.8 प्रतिशत रही।

तुर्की में मुद्रास्फीति में वृद्धि हो रही है, जबकि लीरा (तुर्की की मुद्रा का नाम है) रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर रही है। ऐसा इस वजह से माना जा रहा क्योंकि राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के दबाव में देश के केंद्रीय बैंक ने सितंबर में एक प्रमुख ब्याज दर में 5 प्रतिशत अंक की कटौती की थी। कमज़ोर मुद्रा ने आयात, ईंधन और रोजमर्रा की वस्तुओं को महंगा बना दिया है।

देश में 8.4 करोड़ लोगों को भोजन और अन्य बुनियादी सामान खरीदने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गत वर्ष डॉलर के मुकाबले लीरा में लगभग 44 प्रतिशथ की गिरावट आई थी। एर्दोगन विकास को बढ़ावा देने के लिए उधार लेने की लागत कम करने पर जोर देते हैं। हालाँकि, अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि ऊँची ब्याज दरें बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने का तरीका हैं।

शिक्षाविदों और पूर्व सरकारी अधिकारियों से बने स्वतंत्र मुद्रास्फीति अनुसंधान समूह ने वार्षिक मुद्रास्फीति दर को 83 प्रतिशत से अधिक पर रखा। इसने कहा कि नवंबर की तुलना में दिसंबर में उपभोक्ता कीमतों में 19.35 प्रतिशत की वृद्धि हुई।