विचार
जनजातियों के समग्र विकास के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की कई अभूतपूर्व पहलें
धवल पटेल - 4th October 2021

भारत में जनजातियों की अपनी अलग संस्कृति, त्यौहार और जीवन-शैली है। हालाँकि, उन्हें राष्ट्रीय मुख्यधारा के विकास के साथ नहीं मिलाया गया है। देश में स्वतंत्रता के बाद अनुसूचित जनजाति के लोगों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए कुछ खास कार्य नहीं हुआ। बीते सालों में कांग्रेस कार्यकाल में भी जनजातियों के विकास के लिए न के बराबर काम हुआ है।

इस बात का संज्ञान लेते हुए देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारतरत्न स्वर्गस्थ अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का विभाजन करके अलग से जनजातीय कार्य मंत्रालय बनाया, ताकि भारतीय समाज के सबसे वंचित अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के सामाजिक एवं आर्थिक विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा सके।

जनजातियों के समग्र विकास को सुगम और तेज़ करने के लिए भारत का संविधान इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान देता है। भारत का संविधान मौलिक अधिकारों में शोषण, छुआछूत से सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और अनुसूचित जनजाति के कल्याण की देखभाल के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का प्रावधान है।

2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 1045.46 लाख आदिवासी जनसंख्या है जो देश की कुल जनसंख्या का 8.6 प्रतिशत है। हाल के समय में जनजाति क्षेत्र में आजीविका हेतु स्थानांतरण एक मुख्य समस्या बन गया है।

हालाँकि ये स्थानांतरण दो प्रकार के होते हैं- एक जो पढ़ लिखकर नई प्रौद्योगिकी व्यवस्था, शासकीय सेवा में कार्यरत होने के कारण किया गया हो जिसे अपनी इच्छा से किया गया स्थानांतरण कहते हैं और दूसरा वह जिसमें गाँव में काम न होने कारण मजबूरी में कुछ महीनों के लिए गाँव छोड़कर जाना पड़ता है जिसे अनिच्छा से किया गया स्थानांतरण कहते हैं।

आजीविका के लिए जो स्थानांतरण होता है, वह मुख्य तौर पर शहर में या सींचित कृषि क्षेत्र में मजदूरी करते हैं और हम भली-भाँति जानते हैं कि यह लोग कार्य के स्थान पर किस प्रकार से जीवन जीते हैं। इस स्थानांतरण को रोकने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अनुसूचित जनजाति मोर्चा द्वारा संसदीय संकुल विकास परियोजना का कार्यक्रम होने जा रहा है।

इसका मुख्य उद्देश्य है गाँव के प्राकृतिक संसाधन के आधार पर ग्राम परिसर में रोजगार निर्माण करना है जिसमें कृषि और वन आधारित उत्पादों की उत्पादकता बढ़ाना है, उससे जुड़ी तमाम प्रक्रिया करना और विपणन हेतु नई व्यवस्था तैयार करना आदि शामिल है। 

इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के परिणाम से कृषि को बचाने के लिए कार्य करना, जल, वन तथा जैव-विविधता संवर्धित करने हेतु कार्य करना और यह सब करने के लिए समाज की अपनी व्यवस्था बनाना भी इसमें सम्मिलित है।  

ये सब कार्य करने के लिए ग्राम सभा का चयन करना भी इस कार्यक्रम के अंतर्गत आता है। इसमें जिले में स्थित तकनीकी संस्था, अन्य तकनीकी संस्थाएँ, शासकीय विभाग, स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी भी अपेक्षित है।

इस कार्य की अगुवाई अपने क्षेत्र के सांसद कर रहे हैं। इसकी वजह से आने वाले तीन वर्षों में चुनिंदा ग्राम समूह में वहाँ के लोगों की परिषद् सेवा समिति बनाई जाएगी जो तमाम कार्यक्रम साकार करने हेतु कार्य करेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार भारत में अनुसूचित जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। 2014 में पद संभालते ही मोदी ने जनजातियों की बेहतरी के लिए कई पहलें की हैं।

भारत सरकार ने एससी, एसटी और महिला उद्यमियों के लिए ग्रीनफील्ड व्यावसायिक इकाइयों की स्थापना के लिए स्टैंड अप इंडियायोजना शुरू की। इस योजना के तहत 10 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच ऋण की पेशकश की जाती है। अप्रैल 2021 तक स्टैंड अप इंडिया के तहत कुल 1.14 लाख ऋण स्वीकृत किए गए। इनमें से 4,970 ऋण अनुसूचित जनजाति के आवेदकों को स्वीकृत किए गए हैं।

केंद्र सरकार ने जनजातीय मामलों के मंत्रालय के तहत अनुसूचित जनजाति के छात्रों को विभिन्न छात्रवृत्ति के वितरण के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की प्रक्रिया में तेज़ी लाई है। इसने वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करने और लीकेज को कम करने में मदद की है। जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने आईटी सक्षम छात्रवृत्ति योजना के कार्यान्वयनके लिए स्कॉच अवार्ड: डिजिटल इंडिया गोल्डप्राप्त किया है।

भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्राइफेड) भारत में जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ट्राइफेड द्वारा कार्यान्वित महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक प्रधानमंत्री वन धन योजनाहै।

इस योजना का उद्देश्य जनजातीय उत्पादों के विकास और विपणन के लिए संस्थागत सहायता प्रदान करना है। योजना के तहत पूरे देश में 50,000 वन धन विकास केंद्र स्थापित किए जाने हैं। वन धन योजना अप्रैल 2018 में शुरू की गई थी। इसने भारत के 270 जिलों में 37,262 वन धन विकास केंद्रों के तहत लघु वन उपज के 6,66,858 संग्रहकर्ताओं को जोड़ा है।

ट्राइफेड ने ई ट्राइब्स इंडियाकार्यक्रम के साथ लघु वनोपज और हस्तशिल्प के खुदरा विपणन को ऑनलाइन कर दिया है। इसने खुदरा विपणन के लिए ‘tribesindia.com’ वेबसाइट बनाई और समर्पित की है। इसने एमएफपी को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए अमेज़ॉन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, पेटीएम जैसी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

भारत सरकार ने वन बंधु कल्याण योजना शुरू की जिसका उद्देश्य आदिवासियों के सर्वांगीण विकास के लिए जनजातीय लोगों के आवश्यकता-आधारित और परिणाम-उन्मुख समग्र विकास हेतु सक्षम वातावरण बनाना है।

यह जनजातीय कल्याण विभाग, एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी, एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाओं जैसे सामानों और सेवाओं के वितरण के लिए संस्थानों को मजबूत करके कार्यान्वित किया गया है।

जनजातीय मामलों का मंत्रालय भारत में अनुसूचित जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए अथक प्रयास कर रहा है, साथ ही जनजातियों की जातीय संस्कृतियों के संरक्षण पर ज़ोर दे रहा है।

मंत्रालय ने देश में जनजातीय आबादी के स्वास्थ्य मानकों में सुधार की निगरानी और प्रस्तुत करने के लिए स्वास्थ्य पोर्टललॉन्च किया है। निरंतर प्रयासों और समन्वय से जनजातीय आबादी ने मानव विकास के मानकों- साक्षरता दर, सकल नामांकन, शिशु मृत्यु दर, बाल मृत्यु दर, संस्थागत प्रसव, जीवन प्रत्याशा, आदि में जबरदस्त सुधार दिखाया है।

मोदी के नेतृत्व में जनजातीय मामलों का मंत्रालय धन और नवीन विचारों में बढ़े हुए परिव्यय के साथ आदिवासी आबादी के समग्र विकास के लिए काम कर रहा है। निरंतर प्रयास सकारात्मक बदलाव लाएँगे, जातीय संस्कृति को संरक्षित करते हुए जनजातियों का विकास करेंगे।