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तिब्बत स्वतंत्रता आंदोलन का चीनी औपनिवेशिक बोर्डिंग विद्यालयों के नेटवर्क का खुलासा

तिब्बती स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित वकालत समूह तिब्बत एक्शन इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सरकार की नीतियाँ चार में से तीन तिब्बती छात्रों को औपनिवेशिक बोर्डिंग विद्यालयों के एक बड़े नेटवर्क में जाने को विवश कर रही हैं, जो 6-18 आयु वर्ग के आठ से नौ लाख बच्चों को उनके परिवारों और समुदायों से अलग कर रहे हैं।

बोर्डिंग विद्यालयों का ये नेटवर्क चीनी कम्युनिस्ट पार्टी शासन के किसी भी प्रतिरोध को समाप्त करने के लिए चीनी राष्ट्रपति के तिब्बती पहचान को खत्म करने और इसे चीनी राष्ट्रवादी पहचान के साथ परिवर्तित करने के अभियान की आधारशिला है।

रिपोर्ट में कहा गया कि तिब्बती बोर्डिंग विद्यालय के छात्र अपने परिवारों, समुदायों और संस्कृति से अलग होने के चलते अकेलेपन व अलगाव की अत्यधिक भावनाओं सहित भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक परेशानियों से भी जूझ रहे हैं।

आरोप लगाया गया कि तिब्बत में चीन की यह प्रणाली कई अंतर-राष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का उल्लंघन करती है, जिनमें चीन एक पक्ष है। साथ ही चीन के अपने घरेलू कानून भी सम्मिलित हैं।

तिब्बती माता-पिता विकल्पों की कमी के चलते बच्चों को बोर्डिंग विद्यालयों में भेजने के लिए विवश हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि अलग रहने के कारण बच्चे अपने धर्म का पालन नहीं कर पा रहे हैं।

रिपोर्ट ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त से अनुरोध किया कि वह तत्काल दौरा करें और चीन के सरकारी औपनिवेशिक बोर्डिंग विद्यालयों में तिब्बती बच्चों की स्थिति की जाँच के लिए सार्थक और मुक्त पहुँच सुनिश्चित करें।

संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों से चीनी सरकार से विद्यालय पाठ्यक्रम के सभी स्तरों पर राज्य के प्रचार, राजनीतिक विचारधारा व उपदेश के उपयोग को रोकने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि तिब्बती छात्रों को अपने स्वयं के इतिहास, संस्कृति और धर्म के बारे में जानने की अनुमति दी जाए।