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केंद्र सरकार करेगी देशद्रोह कानून पर पुनर्विचार, सर्वोच्च न्यायालय से की गई अपील

केंद्र सरकार ने सोमवार (9 मई) को सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि उसने देशद्रोह कानून के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने और जाँच का निर्णय लिया है। इसको लेकर न्यायालय से अपील की गई कि मामले पर सुनवाई तब तक ना की जाए, जब तक सरकार जाँच ना कर ले।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल किए गए हलफनामे में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण में देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे में परतंत्रता के समय में बने देशद्रोह के कानून पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

हलफनामे में कहा गया, “देशद्रोह कानून को लेकर जताई जाने वाली आपत्ति पर भारत सरकार को ज्ञान है। कई बार मानवाधिकार को लेकर भी सवाल उठाए जाते हैं। हालाँकि, इसका उद्देश्य देश की संप्रभुता और अखंडता को अक्षुण्य रखना होना चाहिए।”

केंद्र ने कहा, “जाँच प्रक्रिया के दौरान सर्वोच्च न्यायालय से अपील है कि वह इस कानून की वैधता की जाँच करने में समय ना व्यतीत करे।” सर्वोच्च न्यायालय में कई याचिकाएँ दाखिल करके औपनिवेशिक काल में बनाए गए कानूनों की जाँच करने की बात कही गई थी। सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में इसी का जवाब दाखिल किया है।