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अजमेर में मौलवी से मित्रता कर आतंकी अली दिल्ली आया और झूठे पहचान पत्र बनवाए

दिल्ली में पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी अशरफ अली ने पूछताछ में कई खुलासे किए कि किस तरह 20 वर्ष पहले उसे आईएसआई के ‘प्रतिभा-खोज गुप्तचर’ ने चुना, उसकी सहायता की और पैसों का लालच देकर आतंकवादी बना दिया।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के रास्ते भारत में उसे प्रवेश करवाया गया। यहाँ अजमेर में अशरफ अली की एक मौलवी ने सहायता की और उसे दिल्ली पहुँचाया। उसने मौलवी के परिवारवालों से करीबियाँ बढ़ाईं और उनके खातों पर आईएसआई हैंडलर नसीर से पैसे मंगवाने लगा।

डीसीपी (विशेष प्रकोष्ठ) प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि अजमेर में अली ने एक स्थानीय मस्जिद के मौलवी से मित्रता की और दो वर्ष तक रहा। 2006 में मौलवी के साथ दिल्ली गया और कारखानों में दुआ पढ़नी शुरू की। वह मौलवी के अन्य रिश्तेदारों से मिला और उनका विश्वास जीता। वह उन्हीं के खातों में आईएसआई हैंडलर नसीर से पैसे मंगवाने लगा था।

दिल्ली में वह जिस किराए के घर में रहता था, वहाँ के मकान मालिक की सहायता से उसने  आधार कार्ड बनवा लिया था। 2007 में वह गाज़ियाबाद में रहने लगा, जहाँ उसने वैशाली में बदरुनिसा नाम की महिला से विवाह किया। विवाह उसने सिर्फ राशन कार्ड बनवाने के लिए किया था।

कुछ महीनों बाद वह पत्नी को छोड़कर बिहार के कटिहार चला गया। वहाँ उसने एक मुखिया की सहायता से निवास प्रमाण-पत्र बनवाया। इसका उपयोग उसने भारतीय पासपोर्ट बनवाने के लिए किया।

एसीपी ललित मोहन नेगी और हृदय भूषण की अगुआई में दिल्ली पुलिस टीम की पूछताछ में उसने बताया कि अपने हैंडलर के निर्देशों पर 2009 के करीब वह जम्मू-कश्मीर निकल गया। सूत्रों के मुताबिक, वह 2017 तक घाटी में रहा और वहाँ उसने आतंकी गतिविधियों में भाग लिया।  अली अशरफ लगातार अपने आईएसआई हैंडलर के संपर्क में रहता था।