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शी जिनपिंग के पुनः एकीकरण की बात को ताइवान ने इतिहास की विकृति करार दिया

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार (9 अक्टूबर) को अलग हुए द्वीप के साथ बढ़ते तनाव के बीच ताइवान के एकीकरण को लेकर कहा, “ताइवान प्रश्न का समाधान किया जाएगा और इसमें कोई बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

शी ने 1911 की क्रांति की 110वीं वर्षगाँठ, जिसने पहले चीनी गणराज्य की स्थापना की, के उपलक्ष्य में बीजिंग में एक बैठक में कहा, “शांतिपूर्ण तरीकों से मातृभूमि को वापस देश में सम्मिलित करना ताइवान में हमारे हमवतन सहित चीनी राष्ट्र के समग्र हितों के अनुरूप है।”

शी की टिप्पणी चीन द्वारा ताइवान के वायु रक्षा क्षेत्र में लगातार चार दिनों तक एक सार्वजनिक बल प्रदर्शन में सैन्य लड़ाकू विमान भेजने के बाद आई है।

ताइवान खुद को एक संप्रभु राष्ट्र मानता है लेकिन चीन स्व-शासित द्वीप को एक अलग प्रांत के रूप में देखता है। बीजिंग ने एकीकरण हासिल करने के लिए बल के संभावित उपयोग से मना नहीं किया है।

ताइवान की सरकार ने शी के भाषण को ‘इतिहास की विकृति’ करार दिया और बीजिंग से द्वीप को धमकी देना बंद करने का आह्वान किया।

शी जिनपिंग के भाषण को ऐतिहासिक तथ्यों का एकतरफा विरूपण बताते हुए ताइवान की मुख्यभूमि मामलों की परिषद ने एक बयान में कहा, “सुन यात-सेन और अनगिनत क्रांतिकारी शहीदों ने एशिया में पहला लोकतांत्रिक गणराज्य चीन गणराज्य बनाया। चीन गणराज्य ताइवान में अडिग रूप से खड़ा है।”

ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन के रविवार को उसी कार्यक्रम के उपलक्ष्य में एक भाषण देने की अपेक्षा है, जिससे उन्हें ताइवान जलडमरूमध्य में विशेष रूप से तनावपूर्ण सप्ताह के बाद शी को जवाब देने का मौका मिलेगा।