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ताइवान की राष्ट्रपति की चीन को नसीहत- निरंकुशता के विरुद्ध होगा लोकतंत्र का युद्ध

नए वर्ष पर ताइवान ने चीन को नसीहत देते हुए कहा कि स्वतंत्रता अपराध नहीं है। निरंकुशता के विरुद्ध लोकतंत्र का युद्ध होगा।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने कहा कि चीन की ओर से सेना और कूटनीतिक दबाव के कारण देश को अपनी स्वतंत्रता और प्रजातंत्र को लेकर बहुत दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा, “प्रजातंत्र और स्वतंत्रता के लिए काम करना अपराध नहीं है। हॉन्ग-कॉन्ग के समर्थन में ताइवान की स्थिति नहीं परिवर्तित होगी। अपनी चिंताओं को ज़ाहिर करने के बावजूद मुश्किल से प्राप्त की गई स्वतंत्रता व प्रजातंत्र को लेकर हम गंभीर हैं।”

ताइवान के राष्ट्रपति ने चीन का नाम लेकर कहा, “हम देश को पहले से भी बेहतर बनाएँगे। हम विश्व को यह दिखा देंगे कि प्रजातंत्र वाले ताइवान में यह शक्ति है कि वह सत्तावादी चीन से बाहर निकलकर और भी बेहतर बन सकता है। हम दबाव का सामना कर सकते हैं।”

चीन की ओर से लगातार कूटनीतिक दबाव बढ़ने के कारण उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता, प्रजातंत्र को बनाए रखने के लिए विश्व से जुड़ना आवश्यक है। विश्व से जुड़े रहने पर हमारा आर्थिक विकास जारी रहता है। हमारा सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क भी मजबूत बना रहता है और इससे हमारे देश के आत्मसम्मान की भी रक्षा होती है।

बता दें कि नए वर्ष के मौके पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने देश को संबोधित करते हुए वादा किया कि ताइवान को चीन में मिलाकर ही रहेंगे।