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श्रीलंका में पुनः लगाया गया आपातकाल, राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की हो रही है आलोचना

आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में पुनः आपातकाल लागू कर दिया गया है। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने इसकी घोषणा कर दी। एक अधिकारी ने बताया कि आपातकाल शुक्रवार मध्यरात्रि से प्रभावी हो गया।

एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे का यह निर्णय जनता की सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं को बरकरार रखने के लिए है, ताकि देश का सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित हो सके।

श्रीलंका में लोग लगातार सड़क पर आकर सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे हैं। आपातकाल के अंतर्गत पुलिस और सुरक्षाबलों को मनमाने तरीके से किसी को भी गिरफ्तार करने और हिरासत में लेने की शक्ति मिल जाती है।

देश के मानवाधिकार निकाय, मुख्य वकीलों के निकाय, विपक्ष और यहाँ तक ​​​​कि राजनयिक समुदाय के कुछ सदस्यों ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है।

श्रीलंका के मानवाधिकार आयोग ने कहा कि वह आपातकाल की घोषणा को लेकर बहुत चिंतित है। बयान में कहा गया, “हम सरकार से इस उद्घोषणा के कारणों को जनता को समझाने का आग्रह करते हैं क्योंकि विरोध काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा है और सामान्य पुलिस कार्रवाई के दायरे में है।”

आगे कहा गया, “हम अपेक्षा करते हैं कि भाषण और सभा की स्वतंत्रता, गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े अधिकारों के साथ अन्य मौलिक अधिकारों एवं स्वतंत्रताओं को आपातकाल की अवधि के दौरान प्रभावित या अपमानित नहीं किया जाएगा।”

मुख्य विपक्षी दल समागी जाना बालवेगया के नेता साजिथ प्रेमदासा ने भी इस कदम पर सवाल उठाया और राष्ट्रपति को पद छोड़ने को कहा है।