समाचार
सोलर पीएलआई योजना को और कंपनियाँ जोड़ने हेतु कई भागों में बाँटा जाएगा

सौर ऊर्जा उपकरणों के लिए पीएलआई योजना को दो या अधिक भागों में विभाजित किया जा सकता है।

यह प्रभाग 19,500 करोड़ रुपये की इस पहल को विभिन्न स्तरों पर स्वदेशी मॉड्यूल बनाने में लगी और अधिक कंपनियों को सम्मिलित करने की अनुमति देगा।

इकोनॉमिक टाइम्स को एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, “हम पीएलआई को पॉलीसिलिकॉन से मॉड्यूल बनाने, वेफर्स से मॉड्यूल और सेल से मॉड्यूल विनिर्माण के लिए अलग-अलग भागों में विभाजित कर सकते हैं।

मॉड्यूल बनाने में चार चरण होते हैं, जिसमें वेफर्स, सेल, मॉड्यूल और पॉलीसिलिकॉन है।

भारत में वर्तमान में 15 गीगावॉट की क्षमता है लेकिन यह किसी भी पॉलीसिलिकॉन या वेफर उत्पादन के लिए ज़िम्मेदार नहीं है।

पूरी प्रक्रिया के एकीकरण को बढ़ाने के लिए 4,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ इस पीएलआई योजना का पायलट दौर प्रस्तावित किया गया था।

जिंदल इंडिया सोलर, शिरडी साई इलेक्ट्रिकल्स और रिलायंस न्यू एनर्जी को प्रोत्साहन दिया गया क्योंकि वे पॉलीसिलिकॉन से मॉड्यूल बनाने के लिए प्रतिबद्ध थे।

केंद्रीय नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने योजना के तहत लाभ प्राप्त करने हेतु पात्र होने के लिए न्यूनतम 90 प्रतिशत मूल्यवर्धन और 22 प्रतिशत मॉड्यूल प्रदर्शन निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया है।

इस बीच, उद्योग ने केंद्र सरकार से स्थानीय मूल्यवर्धन और आवश्यक दक्षता आवश्यकताओं को कम करने के लिए कहा है।