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सिंघु सीमा पर मुर्गी ना देने पर निहंगों के समूह ने श्रमिक पर हमला किया, पैर तोड़ा

सिंघु सीमा पर किसानों के विरोध स्थल के निकट एक दलित व्यक्ति की सिखों के पवित्र ग्रंथ के कथित अपमान को लेकर निर्मम हत्या करने के कुछ दिन बाद निहंग सिखों के एक समूह ने गुरुवार (21 अक्टूबर) को एक मुर्गी पालन कंपनी के श्रमिक पर हमला कर दिया।

मुर्गी पालन कंपनी के एक दलित श्रमिक मनोज पासवान मुर्गियाँ लेकर अपने वाहन में विरोध स्थल के निकट से निकल रहा था, जब उसे निहंगों के एक समूह ने रोक लिया। उन्होंने पासवान से मुर्गी की मांग की। पासवान ने जब इससे मना कर दिया तो उसके साथ मारपीट की गई और उसका पैर तोड़ दिया गया। यह घटना सिंघु सीमा पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के मुख्य मंच के पीछे की है।

घटना के बारे में बताते हुए पासवान ने कहा, “एक सिख आया और उसने मुझसे मुर्गी मांगी। मैंने कहा कि मैं नहीं दे सकता, मेरे पास सीमित संख्या में मुर्गियाँ हैं। बस इतना कहते ही उसने मुझे डंडे से पीटना शुरू कर दिया। यही नहीं, मुझे बचाने का प्रयास करने वाले एक व्यक्ति को भी पीटा। वह एक नीले रंग की पोशाक वाला सिख (निहंग) था।”

उत्तरजीवित ने आगे बताया, “उसके बाद मेरा मालिक आया और जनता एकत्रित हुई लेकिन वह आदमी नहीं रुका। मैं भूमि पर गिर पड़ा था, कई मिन्नतों के बाद वह रुका। मैं एक श्रमिक हूँ। पता नहीं अब कब तक चल पाऊँगा।”

बता दें कि तलवार चलाने वाली निहंगों की भीड़ ने गणतंत्र दिवस पर हुए समारोह को बाधित करने के प्रयास में नई दिल्ली में भगदड़ मचवा दी थी। अप्रैल 2020 में निहंगों के एक समूह ने पुलिस अधिकारियों पर हमला किया और कोविड-19 के राष्ट्रव्यापी प्रतिबंधों के दौरान पंजाब के पटियाला में एक सब्जी बाज़ार में अधिकारी का हाथ काट दिया था।