इन्फ्रास्ट्रक्चर
सितंबर में भारत ने टीकाकरण अभियान को दूसरे स्तर पर पहुँचाया, अब अक्टूबर में क्या
सूरज एस - 4th October 2021

पिछले माह मैंने अगस्त में भारत के टीकाकरण अभियान की व्याख्या की थी और अनुमान लगाया था कि सितंबर में 24 करोड़ टीका खुराकें लोगों को दी जाएँगी। सितंबर अब समाप्त हो गया है और आँकड़ा है 23.9 करोड़।

अगस्त के अंत तक जहाँ कुल टीका खुराकें 65.1 करोड़ थीं, वही सितंबर अंत तक यह आँकड़ा 89 करोड़ पर पहुँच गया। पूरे माह में प्रतिदिन औसत रूप से लगभग 80 लाख टीका खुराकें दी गईं। ये आँकड़े अतुलनीय है, जिन्हें समझने के लिए निम्न तुलनाएँ देखें-

सितंबर के माह में विश्व भर में लगाए गए टीकों में 27 प्रतिशत की भागीदारी भारत ने रखी, जो कि जनसंख्या में इसकी भागीदारी (16 प्रतिशत) से काफी अधिक है। वहीं, 17-18 सितंबर के दो दिनों में विश्व भर में लगाए गए टीकों का लगभग 60 प्रतिशत भाग भारत में लगा।

इसका अर्थ हुआ कि इन दो दिनों में पूरे विश्व ने मिलकर जितनी टीका खुराकें नहीं लगाईं, उससे अधिक भारत ने लगाई। सितंबर में कुल टीका खुराकों के मामले में भारत ने चार महाद्वीपों- यूरोप, दक्षिण व उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के योग से अधिक टीका खुराकें लगाईं।

आप इस डाटा को सरलता से यह कहकर नकार सकते हैं कि पश्चिम में टीकाकरण अभियान लगभग पूर्ण हो गया है। हालाँकि यह सत्य नहीं है, जैसा कि आप निम्न टेबल में देख सकते हैं-

इस टेबल में सरलता के लिए हमने कुछ धारणाएँ बनाईं हैं जैसे दो टीका खुराकों के बीच की अवधि को नहीं गिना है। हालाँकि, इस टेबल से स्पष्ट हो जाता है कि अपनी वयस्क जनसंख्या का एक सम्मानजनक स्तर तक टीकाकरण करने में पश्चिम कितना पीछे है।

भारत और विश्व के अन्य स्थानों पर जिस दर से टीकाकरण हो रहा है, उससे यह अंतर और भी गहरा जाता है। भारत जहाँ तीन महाद्वीपों- उत्तरी अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के योग के बराबर टीकाकरण कर रहा था, एक माह में वह चार महाद्वीपों के योग के बराबर टीकाकरण को ले आया।

ये चार महाद्वीप हैं- उपरोक्त तीन के साथ दक्षिण अमेरिका जो सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। इसमें और बड़ी बात यह है कि सितंबर में अफ्रीका को छोड़कर सभी महाद्वीपों में टीकाकरण अभियान की गति धीमी हुई है।

80 प्रतिशत या उससे अधिक की उच्च टीकाकरण दर 1 करोड़ लोगों से कम जनसंख्या वाले छोटे देशों में आज क्यों एक सकारात्मक बात है? उनसे एक स्वाभाविक प्रश्न नहीं पूछा जाता- वे इस स्तर पर महीनों पहले क्यों नहीं पहुँचे?

मान लें कि कुल जनसंख्या में तीन-चौथाई वयस्क हैं- विकसित विश्व में यह एक मानक आँकड़ा है, तो उन्हें 75 लाख वयस्कों के लिए 1.5 करोड़ टीका खुराकों की आवश्यकता थी। अब अक्टूबर आ गया है। भारत ने आधा दर्जन से अधिक दिनों पर एक करोड़ से अधिक टीका खुराकें लगाईं हैं।

उत्पादन- भारत में बढ़ रहा है, शेष स्थानों पर रुका है?

दूसरे देशों का सितंबर टीकाकरण डाटा चिंताजनक है। सर्दियों का फ्लू मौसम दूर नहीं है, ऐसे में आवश्यकता है कि टीकाकरण दर को तेज़ी से बढ़ाया जाए। एक ओर जहाँ भारत ऐसा कर पा रहा है, वहीं अन्य देश अटते हुए हैं। क्यों?

पश्चिम में टीकाकरण के राजनीतिक विरोध के अलावा उत्पादन एवं आपूर्ति प्रमुख समस्या है। सितंबर तक कुल मिलाकर भारत ने 1 अरब टीका खुराकों का उत्पादन कर लिया था जिसमें घरेलू उपभोग, निर्यात, आपूर्ति शृंखला में उपलब्ध खुराकें एवं व्यर्थ हो चुकी खुराकें सम्मिलित हैं। वहीं, विश्व के अन्य स्थानों पर कहानी कुछ और है-

यूएस और ईयू का अब तक का कुल उत्पादन भारत से थोड़ा अधिक है लेकिन सितंबर की आपूर्ति से बहुत कुछ उजागर होता है। इन भूभागों में फाइज़र-बायोनटेक की आपूर्ति 9 करोड़ तक की है जिसका स्रोत यूएस और ईयू के कई उत्पादन स्थल हैं।

मॉडर्ना का आँकड़ा 3 करोड़ से कम का है। जबकि पुणे में अकेले सीरम इंस्टीट्यूट ने 20 करोड़ से अधिक कोविशील्ड टीका खुराकों का उत्पादन किया है। डाटा दर्शाता है कि अब कोवैक्सीन का उत्पादन मॉडर्ना को पार कर गया है।

डाटा और कुछ घटनाएँ दर्शाती हैं कि एमआरएनए टीका का उत्पादन बढ़ाने में कितना संघर्ष है- मॉडर्ना ने कहा था कि यूनाइटेड स्टेट्स के बाहर टीका आपूर्ति धीमी की जाएगी और ईयू छह सप्ताहों के लिए टीका निर्यात पर प्रतिबंध लगाएगा।

आगे की राह

अक्टूबर में कोविशील्ड और कोवैक्सीन की मिलकार कुल 27-28 करोड़ टीका खुराकें खरीदने की योजना है। अक्टूबर की शुरुआत सितंबर से बकाया 5 करोड़ टीका खुराकों के साथ हुई है।

2 अक्टूबर को ज़ाइडस कैडिला को व्यावसायिक बिक्री की अनुमति मिली। यह एक महत्त्वपूर्ण प्रगति है क्योंकि यह 12 से 17 वर्ष आयु वालों के लिए भी वैध है। बायोलॉजिकल ई-वैक्सीन के लिए आपातकाल उपयोग अनुमति मिल जाने से सोने पर सुहागा हो जाएगा।

अगस्त में भारत की टीकाकरण दर तेज़ी से बढ़ी थी। सितंबर में हमने देखा कि भारत ने टीकाकरण के मामले में सभी देशों को पीछे छोड़ दिया। अक्टूबर हमें क्या देगा? 30 करोड़ से अधिक खुराकों की उपलब्धता और 90.5 करोड़ टीका खुराकें दे चुकने के साथ माह आरंभ हुआ है, ऐसे में 1 अरब के आँकड़े से कितना आगे जाएँगे हम?