समाचार
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना को हरी झंडी दी

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना को स्वीकृति दे दी। साथ ही निर्माण की निगरानी हेतु राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति का मंगलवार को पुनर्गठन किया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एक बार परियोजना पूरी हो जाने के बाद दिल्ली और देहरादून के मध्य यात्रा का समय वर्तमान 5-6 घंटे से आधा होने की अपेक्षा है।

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में वन महानिदेशक सीपी गोयल को विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष बनाया।

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष के प्रतिस्थापन को उत्तराखंड के मुख्य सचिव पर विश्वास की कमी की अभिव्यक्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वह समिति को यह सुनिश्चित करने के लिए पुनर्गठित कर रहे हैं, ताकि कार्यान्वयन के कार्य को करने में एक व्यापक समझ बने।

न्यायालय ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के सुझाव को भी स्वीकार कर लिया, जो क्रमशः केंद्र और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से पर्यावरणविद्, हरित कार्यकर्ता और हिमालयी पर्यावरण अध्ययन व संरक्षण संगठन के संस्थापक अनिल प्रकाश जोशी का मसौदा तैयार करने के लिए उपस्थित थे। पीठ ने जोशी को शामिल करने पर याचिकाकर्ता एनजीओ की आपत्ति को खारिज कर दिया।

केंद्र व एनएचएआई ने एनजीओ के सुझाव पर पर्यावरणविद् विजय धस्माना को सम्मिलित कर लिया, जो 380 एकड़ बंजर भूमि को शहरी वन ‘अरावली जैव विविधता पार्क’ में परिवर्तित करने के लिए प्रशंसित हैं।