व्यंग्य
सी पी जोशी बयान विवाद- कौन कर सकता है हिंदू धर्म की बात, किसको है यह अधिकार

कांग्रेस नेता सी पी जोशी ने एकदम सही बात कही है कि निम्न जाति के लोगों को हिंदू धर्म की बात नहीं करनी चाहिए, भला करें भी क्यों, वें हिंदू थोड़ी हैं। यही कहकर तो जनजातीय क्षेत्रों में धर्मांतरण कराए जा रहे हैं।

हिंदुओं के विषय में बात करने का अधिकार सिर्फ ब्राह्मणों को है और वह भी ‘जनेउधारी’ ‘शिवभक्त’ ब्राह्मण को। भले ही ‘शिवभक्त’ ब्राह्मण के परदादा जी को भगवान शिव के लिए सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में कोई रुचि नहीं थी, लेकिन राहुल गांधी ने कहा है तो हमने मान लिया कि वे शिवभक्त हैं।

एक ओर राहुल गांधी यह कहते आए हैं कि ‘हिंदुत्व’ में उनका कोई विश्वास नहीं है और दूसरी ओर मध्य प्रदेश की रैलियों में यह भी दावा कर रहे हैं कि उनसे बेहतर हिंदू धर्म को कोई नहीं समझता। सही बात है क्योंकि एक आम हिंदू तो मात्र 33 करोड़ देवी-देवताओं में विश्वास करता है लेकिन उन्हें तो ‘पिछत्तीस’ करोड़ देवी-देवता साक्षात दर्शन दे चुके हैं।

कांग्रेस में अन्य नेता भी हिंदू धर्म के ज्ञाता हैं। एक तो इतने विद्वान हैं कि उन्होंने पुस्तक ही लिख डाली “वाई आई एम अ हिंदू”। किताब के शीर्षक से तो समझ नहीं आता कि वे अपने हिंदू होने पर शोक मना रहे हैं या अपने हिंदू होने का दावा कर रहे हैं, खैर वह तो किताब पढ़ने वाला ही जानें। इन महानुभाव ने निम्न जाति के नरेंद्र मोदी को विशेष उपमा दी- “शिवलिंग पर बैठा बिच्छू, जिसे न हाथ से हटा सकते हैं और न चप्पल से मार सकते हैं।” जब शशि थरूर यह जानते ही नहीं कि भगवान शिव और बिच्छू का क्या संबंध है कि बिच्छू को वहाँ से हटाने की आवश्यकता ही नहीं है तो हिंदू धर्म पर उनकी पुस्तक पता नहीं क्या पाठ पढ़ाती होगी। खैर उनके कथन से एक फायदा तो हुआ, उन्होंने शिवलिंग कहकर संघ को पहली बार सम्मानीय शब्दों से संबोधित किया।

अब जानते हैं निम्न वर्ग के नरेंद्र मोदी ने हिंदू धर्म के विषय में ऐसा क्या कह दिया जो सी पी जोशी को इतना खटक गया। मोदी कहते हैं कि वे सर्वोच्च न्यायालय के कथन से सहमत हैं कि हिंदू एक धर्म नहीं बल्कि एक जीवन शैली है। वे हिंदू के उदारवादी व सर्व-स्वीकार्य स्वरूप के बारे में कहते हैं। शायद यही बात उन्हें खटक गई कि यदि भाजपा ने खुद को सर्व-स्वीकार्य पार्टी सिद्ध कर दिया तो उन्हें कौन वोट देगा? ‘भगवा आतंक’ के उनके कथात्मक (नेरैटिव) का क्या होगा!

यह व्यंग्य हलके-फुलके मन से पढ़ने के लिए है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा समुदाय का अपमान करना नहीं है।