व्यंग्य
व्यंग्य- अमेठी नहीं देश की बेटी हैं प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी को अमेठी की बिटिया कहा जाना बिल्कुल गलत है। वे तो देश की बिटिया हैं। जब दरबारी मीडिया उनके करिश्माई व्यक्तित्व की सराहना में लेख पर लेख छाप रहा है तो बहती गंगा में हाथ धोने में क्या बुराई है।

क्या आप जानते हैं कि वे एक अच्छी राजनेता क्यों हैं? क्योंकि उनके अपनी माँ, भाई और पति से अच्छे संबंध हैं। मोदी के व्यक्तित्व पर इसी बात पर ही तो सवाल उठे थे कि उन्होंने अपनी पत्नी को छोड़ दिया था इसलिए इस कसौटी पर प्रियंका खरी उतरती हैं क्योंकि आरोपों के बावजूद उन्होंने अपने पति का साथ नहीं छोड़ा।

इसके अलावा उनकी सूरत दादी इंदिरा गांधी से मिलती है जो उन्हें एक राजनेता के लिए उपयुक्त बनाती है। सिनेमा में भी डुप्लीकेट से काम चलता तो निर्माताओं के काफी पैसे बच जाते। यह भी कहा जा रहा है कि उनकी दादी की अंतिम इच्छा थी कि वे राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएँ। “राष्ट्रमाता” की आज्ञा की अवज्ञा देश की बेटी कैसे कर सकती है।

दिसंबर 2017 को द पायनीर  ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से कहा था कि सोनिया गांधी नहीं चाहती थीं कि सत्ता दो केंद्रों में बँटे इसलिए उन्होंने प्रियंका गांधी को पीछे रखा था। अब शायद सोनिया गांधी को दो नाव चलाने का यह लाभ दिख रहा होगा कि एक डूबी तो दूसरी पर सवार हुआ जा सकता है।

प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर का महासचिव बनाए जाने के बाद टाइम्स नाउ  पर एक चर्चा के दौरान भाजपा के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इस बात को बखूबी समझाया कि प्रियंका गांधी कैसे एक अच्छी नेता हैं। प्रियंका गांधी कोई आम महिला नहीं हैं, वे कांग्रेस के भावी अध्यक्ष की माँ हैं इसलिए इस प्रकार के महत्त्वपूर्ण पदों पर उनका अधिकार है। अभूतपूर्व नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें यह पद दिया गया है, न कि उनके सरनेम “गांधी” के कारण।

उनके नेतृत्व की सराहना करते हुए भाटिया ने कहा कि 2017 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में प्रियंका को अमेठी और राय बरेली का प्रभार मिला था जहाँ उन्होंने इतना अच्छा प्रदर्शन किया कि कांग्रेस 10 में से 2 सीटों जीती इसलिए वे इस पद की हकदार हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने उन्हें यह पद देकर कोई पक्षपात नहीं किया है, यह उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। क्या गांधी परिवार में जन्म लेने के बाद उन्हें महासचिव बनने का भी अधिकार नहीं है। जैसे सोनिया गांधी अध्यक्ष थीं, अब राहुल गांधी हैं जो कि पहले महासचिव थे।

वे बहुत कर्मठ भी हैं इसलिए हमें उनका मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए। वे ज़मीनी स्तर की नेता हैं जो आपदा में लोगों का दुख बाँटने के लिए वहाँ उपस्थित थीं। वे पैराशूट नेता नहीं हैं। उनमें राजनेता वाले सभी गुण है क्योंकि जब प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बेटी कहकर संबोधित किया था तब उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी जी नीच राजनीति करते हैं।

नरेंद्र मोदी का 56 इंच की छाती वाला जुमला भी शायद इसी नीच राजनीति का हिस्सा रहा होगा जिसका खंडन करते हुए प्रियंका ने कहा था कि देश चलाने के लिए 56 इंच की छाती नहीं दरिया जैसा दिल होना चाहिए। दरिया जैसा दिल भी प्रियंका को विरासत में मिला है क्योंकि नेहरू ने भी बड़ा दिल करके चीन को भारत की धरती दरिया में बहाकर दे दी थी।

खैर इस बात की खुशी है कि कांग्रेस ने जनता के नारे “प्रियंका लाओ, कांग्रेस बचाओ” को गंभीरता से लेकर यह निर्णय लिया है लेकिन मात्र एक प्रचारक को एक राजनेता के रूप में प्रस्तुत कर मीडिया देश की जनता को भ्रमित करने के अलावा और कुछ नहीं कर रही।