व्यंग्य
नाटकीय व्यंग्य- “दिल्ली नहीं तो हरियाणा ले लो”: सेल्समैन अरविंद केजरीवाल

सेल्समैन अरविंद केजरीवाल- मैडम, दिल्ली में गठबंधन कर लो।
शीला दीक्षित- नहींं-नहीं, हमें ज़रूरत नहीं है।
केजरीवाल- मैडम, सात में से दो सीटें लगा देंगे आपके लिए।
शीला दीक्षित- कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर की पार्टी है, दो सीटों में क्या होगा हमारा।
केजरीवाल- मैडम, आप सर की राय ले लो। शायद सर को हमारा ऑफर पसंद आ रहा है।

(कोने में जाकर)
राहुल गांधी- अगर सात में से तीन सीट देता है तो बात कर सकते हैं।
शीला दीक्षित- नहीं राहुल जी। अपको मुझपर भरोसा नहीं है? मैं आपको सातों सीटों पर अच्छे वोट दिलाऊँगी।
राहुल गांधी- मैं तो ‘युवा’ नेता हूँ इसलिए बहकावे में आ गया था। आप अनुभवी हैं, जाकर केजरीवाल से कह दीजिए।
शीला दीक्षित- सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि हमें गठबंधन की आवश्यकता नहीं है।

केजरीवाल- जहाँ पूरा देश मोदी-शाह की दुकान बंद कराने का प्रयास कर रहा है, वहाँ आप उन्हें फायदा दिलाने पर तुले हैं। मैं समझ गया, आपका उनसे कोई गुप्त गठबंधन हुआ लगता है।

(एक सप्ताह बाद)

केजरीवाल- सर, आपको दिल्ली वाला माल पसंद नहीं आया था न, इसलिए आपके लिए हरियाणा से स्पेशल मंगवाया है। इस बार मेरे अकेले का नहीं है जो आप मना कर देंगे, जजपा भी होगा। आप मान जाइए तो दसों सीटों पर जीत जाएँगे जो मोदी-शाह को राष्ट्रीय स्तर पर भी भारी पड़ेगा।

कहानी जारी है…

राजनीतिक घटनाक्रम को नाटकीय स्वरूप देकर हास्यास्पद बनाने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं है।

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