व्यंग्य
व्यंग्य- गांधी जी के सच्चे अनुयायी हैं इमरान खान

“युद्ध से बेहतर हल वार्ता से निकल सकता है।”, कहकर इमरान खान ने संकेत दे दिया है कि वे गांधी जी के अहिंसा के मार्ग के अनुयायी हैं लेकिन वे “एक गाल पर थप्पड़ पड़ने पर दूसरा गाल आगे” करने वालों में से नहीं हैं क्योंकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यदि भारत हमला करेगा तो वे भी प्रतिकार करेंगे। लेकिन इसके अलावा इमरान खान की मुद्राओं में और भी ऐसे संकेत मिले हैं जो उन्हें गांधी जी का सच्चा अनुयायी बनाते हैं। यदि आप इन संकेतों को समझ नहीं पाए हैं तो हम आपको विस्तृत तरीके से समझाते हैं।

गांधी जी के तीन बंदरों की गाथा तो आपने सुनी ही होगी जो बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो के सिद्धांतों को समझाते हैं लेकिन आज के आरोप-प्रत्यारोप के दौर में इन सिद्धांतों का पालन केवल इमरान खान ही कर रहे हैं।

बुरा मत देखो का परिचय देते हुए इमरान खान ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर हमला बोला था क्योंकि वे अपने देश में अल्पसंख्यकों की बुरी स्थिति को नहीं देख रहे थे। चलिए मान लेते हैं कि हिंदुओं और सिखों पर हो रहे अत्याचार या दुर्व्यवहार पर इमरान खान का नियंत्रण नहीं है, जैसे उनका अपने देश के आतंकवादियों पर नहीं है लेकिन पाकिस्तान का संविधान ही अल्पसंख्यकों को उच्च पदों पर विराजने की अनुमति नहीं देता। ऐसे में अगर यह नहीं माना जाता कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक दूसरे दर्जे के नागरिक हैं तो अवश्य ही इमरान खान बुरा नहीं देखना चाहते।

बुरा मत सुनो सिद्धांत पर अडिग होने का परिचय तो इमरान खान ने आज (19 फरवरी को) ही दिया है। वे पाकिस्तान के खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुन सकते। उनका कहना है कि बिना साक्ष्य के पाकिस्तान पर पुलवामा हमले का आरोप न लगाया जाए। जब हमला करने वाला संगठन स्वयं कह रहा है कि इसकी ज़िम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद लेता है और यह संगठन पाकिस्तान में आधारित है, यहाँ तक कि पाकिस्तान की मीडिया भी मानती है कि इसका मुख्यालय पाकिस्तान के पंजाब के बहावलपुर में स्थित है लेकिन फिर भी साक्ष्य मांगना ‘बुरा मत सुनो’ के सिद्धांत के प्रति खान की प्रतिबद्धता ही दर्शाता है।

बुरा मत कहो- इस सिद्धांत तक पहुँचते-पहुँचते इमरान खान चूक गए और इसका पालन स्वयं करने की बजाय भारत को इसकी सीख देने लगे। 8 जनवरी 2019 को इमरान खान ने भारत से कहा कि कश्मीर में उपद्रव होने का आरोप यह पाकिस्तान पर न लगाए। इन उपद्रवों का कारण पाकिस्तान नहीं बल्कि भारत की क्रूर नीति है। न जाने इमरान खान कौन-सी क्रूर नीति की बात कर रहे थे। ऐसी क्रूर नीति जहाँ सेना पर हमला कर रही भीड़ पर पेलेट गन का प्रयोग करने से पहले 100 बार सोचा जाता है, जहाँ पत्थर बरसा रहे लोगों को जवाब देने की बजाय बचकर निकलने का प्रयास किया जाता है? यह बात छिपी नहीं है कि किस तरह पाकिस्तान कश्मीरी युवाओं में अपने प्रोपगेंडा की सामग्री प्रचारित कर ज़हर भर रहा है लेकिन इमरान खान यह भी नहीं देख पाएँगे।

इस लेख का उद्देश्य किसी व्यक्ति का अपमान करना नहीं बल्कि मात्र सत्य को उजागर करना है जिसे अक्सर बातों में उलझाकर छिपाया जाता है।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।