राजनीति
तमिलनाडु में संघ कार्यकर्ता पर प्राणघातक हमला ‘लिंचिंग’ की श्रेणी में नहीं!

सेक्युलरिज़्म के नाम पर चयनित अल्पसंख्यकों को खुली छूट देने की धारणा विकसित करने वाले लेफ्ट (वाम) और लिबरल (उदार) मीडिया में एक नैरेटिव चलता रहा है कि भारत का मुसलमान डरा हुआ है और उसकी ‘लींचिंग’ हो रही है।

जबकि संघ के प्रचारकों पर निरंतर होनेवाले हमले और सुनियोजित हत्याएँ मुख्यधारा के मीडिया में कभी चर्चा, चिंता और चिंतना का विषय नहीं बनतीं। 7 जनवरी 2022 को संघ के पदाधिकारी रविकुमार पर तमिलनाडु के कम्बम (तेनी) में दो मोटारसाइकिल पर आए चार नकाबपोश लोगों ने प्राणघाती हमला किया, जिसमें रविकुमार गंभीर रूप से घायल हुए।

रविकुमार 45 वर्ष के हैं। वे तमिलनाडु के तेनी जिले में धर्म जागरण प्रमुख का दायित्व निर्वाह कर रहे हैं। आजीविका के लिए वे कम्बम कुमुली रोड पर ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स की दुकान चलाते हैं। 7 जनवरी की सुबह वे मोटारसाइकिल से अपनी दुकान खोलने जा रहे थे।

उसी समय चार अज्ञात नकाबपोश लोगों ने उन्हें रोका और गंदी-भद्दी गालियाँ देते हुए लोहे की छड़ें और ‘अरुवल’ (कत्ती) से मारना आरंभ किया। ‘अरुवल’ केरल और तमिलनाडु में एक प्रकार का कृषि उपकरण भी है और इसका प्रयोग हथियार के रूप में भी होता है। प्रायः इसका प्रयोग गैंगस्टर करते हैं।

हमलावरों ने रविकुमार के सिर पर प्रहार करने के लिए अरुवल का ही प्रयोग किया। उन्होंने अरुवल से ही सिर पर पाँच-छह बार प्रहार किया। रविकुमार के लहूलुहान होकर गिर पड़ते ही उन्हें मृत समझकर हमलावर मौके से फरार हो गए।

किसी तरह पुलिस को इस घटना की सूचना मिली और उत्तमपालयम की पुलिस उपाधीक्षक श्रेया गुप्त पुलिस की एक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुँचीं और उन्हें कम्बम सरकारी अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस रविकुमार पर हमला करनेवाले चारों आरोपियों की तलाश कर रही है।

स्थानीय लोगों ने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि 2 जनवरी को रविकुमार और अब्दुल रज्ज़ाक के बीच झगड़ा हुआ था। वास्तव में अब्दुल रज्ज़ाक ने गौमांस का अपशिष्ट रविकुमार के खेत में इमली के पेड़ों के नीचे फेंका था। रविकुमार ने इस घृणित कृत्य की शिकायत की तो अब्दुल रज्ज़ाक ने उनके साथ हाथापाई की थी।

घटना के तुरंत बाद रविकुमार ने अब्दुल रज्ज़ाक के विरुद्ध कम्बम पुलिस स्टेशन (उत्तर) में शिकायत दर्ज कराई थी। उसके बाद 7 जनवरी का यह हमला हुआ है। स्थानीय जनता को अंदेशा है कि हमला 2 जनवरी को हुए झगड़े से जुड़ा होना चाहिए। इसी सूत्र के आधार पर घटनाओं को जोड़कर जाँच की जा रही है।

प्रथमदृष्टया प्रतीत होता है कि गौमांस अपशिष्ट फेंककर विवाद का मुद्दा खड़ा किया और रविकुमार को मारने का षड्यंत्र रचा गया। सर्वविदित है कि केरल-तमिलनाडु में संघ के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। संघ के स्वयंसेवक पर हमले के कारण स्थानीय लोगों में भय का वातावरण है। अतः उस क्षेत्र में पुलिसों को तैनात किया गया है।

ध्यातव्य है कि द्रमुक सरकार ने अभी अपने कार्यकाल का एक वर्ष भी पूर्ण नहीं किया है। संघ-भाजपा कार्यकर्ता और राष्ट्रवादियों पर इस प्रकार हो रहे हमले इस बात की ओर संकेत करते हैं कि हमलावरों का उद्देश्य क्षेत्रवादियों और मजहबियों के उग्रवाद के विरुद्ध उठने वाली आवाज़ को दबाना-कुचलना है।

इस घटना से स्थानीय लोग गहरे सदमे में हैं और उन्हें संदेह है कि इस तरह की घटनाओं को या तो सत्ताधारी पार्टी का समर्थन प्राप्त है या ऐसी घटनाओं की अनदेखी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि द्रमुक अल्पसंख्यक समर्थक सरकार है। उसे प्राप्त अल्पसंख्यकों का खुला समर्थन जगजाहिर है।

सूचना का एक सूत्र यह भी है कि खेत में गोमांस अवशिष्ट फेंकने को लेकर पुलिस में की गई शिकायत के उपरांत रविकुमार को एसडीपीआई (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) के गुंडों ने धमकी दी थी। उल्लेखनीय है कि उनकी धमकी के बाद यह प्राणघाती हमला हुआ है।

केरल के बाद तमिलनाडु में संघ के कार्यकर्ता क्षेत्रवादियों और मजहबियों के निशाने पर हैं। तथाकथित लिबरल मीडिया की दृष्टि में संभवतः इसे लींचिंग नहीं कहा जा सकता। क्योंकि ऐसे मामले उनके मापदंडों में नहीं बैठते। रविकुमार की स्थिति अभी गंभीर है। यह चिंताजनक स्थिति है।

ध्यातव्य है कि सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया एक राजनीतिक पार्टी है। यह इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का राजनीतिक संगठन है। पीएफआई की उग्र, आतंकी, राष्ट्रविरोधी और सांप्रदायिक गतिविधियों को दृष्टिगत रखते हुए उसे प्रतिबंधित करने की माँग होती रही है।

यह लेख पहले पांचजन्य में प्रकाशित हो चुका है।

डॉ आनंद पाटील तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक हैं। वे @AnandPatilCU के माध्यम से ट्वीट करते हैं।