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गति वृद्धि को रद्द करने के उच्च न्यायालय के आदेश को परिवहन मंत्रालय ने दी चुनौती

सड़क परिवहन मंत्रालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की, जिसमें 2018 में एक्सप्रेसवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे और राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा बढ़ाने को रद्द कर दिया गया था।

मंत्रालय के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम देश में सभी प्रकार की सड़कों के लिए अधिकतम गति सीमा अधिसूचित करने का अधिकार देता है।

मंत्रालय ने तर्क दिया कि संशोधित गति सीमा को एक विशेषज्ञ समूह द्वारा उचित अध्ययन और उनकी सिफारिश के बाद अधिसूचित किया गया था, जिसमें सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के नेटवर्क और बेहतर वाहन इंजीनियरिंग को ध्यान में रखा गया था।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गत माह कहा था कि उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने की अनुमति दे दी है और मामला तब कानून मंत्रालय के समक्ष रखा गया था।

पता चला कि देश के शीर्ष कानून अधिकारियों ने भी आदेश को चुनौती देने का पक्ष लिया है। उन्होंने तर्क दिया कि संशोधित गति सीमा अधिसूचित होने के तीन वर्ष से अधिक समय बाद उच्च न्यायालय का आदेश आया है।

अधिसूचना को रद्द करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने देखा था कि मोटर चालकों द्वारा सड़क सुरक्षा नियमों के अनुपालन में कोई सुधार नहीं हुआ था, भले ही एक बेहतर इंजन तकनीक और बेहतर सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर था।

न्यायालय ने कहा था कि तेज गति को सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण मानते हुए केंद्र सरकार द्वारा लिया गया निर्णय रद्द किए जाने योग्य है।