इन्फ्रास्ट्रक्चर
एनएचएआई के इन्विट का उद्देश्य सड़क मुद्रीकरण से 8,000 करोड़ रुपये एकत्रित करना

सड़कों के मुद्रीकरण की सरकार की दीर्घ अवधि योजना को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने शुक्रवार (29 अक्टूबर) को अपना पहला इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश न्यास (इन्विट) लॉन्च किया।

इन्विट के लिए एनएचएआई ने राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को अपने प्रस्ताव दस्तावेज़ सौंप दिए हैं और इसके माध्यम से लगभग 8,000 करोड़ रुपये तक एकत्रित करने का उद्देश्य है। दस्तावेज़ों के अनुसार, यह 29 अक्टूबर को खुलेगा और 2 नवंबर को बंद होगा।

साथ ही, जिन सड़क परिसंपत्तियों को इन्विट के अधीन लाया जाएगा, उनका उद्यमी मूल्य 8,000 करोड़ रुपये होगा जहाँ ऋण 2,000 करोड़ रुपये का होगा। एनएचएआई इन्विट में 390 किलोमीटर की पाँच सड़क परिसंपत्तियाँ हैं जिनका वित्तीय वर्ष 2021-22 में अनुमानित राजस्व 500 करोड़ रुपये है।

ये सड़क परिसंपत्तियाँ राजस्थान, गुजरात, तेलंगाना और कर्नाटक में फैली हुई हैं। एनएचएआई के इन्विट को पहले मई 2020 में जारी होना था लेकिन मार्च 2020 में घोषित देशव्यापी लॉकडाउन के कारण इसे उस समय टाल दिया गया था।

कोविड-19 वैश्विक महामारी संबंधित पाबंदियों का प्रभाव सड़क ट्रैफिक आवागमन और टोल संग्रह पर पड़ा था इसलिए इन्विट को टालने का निर्णय लिया गया था। हालाँकि, केंद्र सरकार ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के प्रस्ताव को दिसंबर 2019 में ही स्वीकृति दे दी थी।

उसके बाद समाचार आया था कि सितंबर तक यह बाज़ार में आ जाएगा। अप्रैल में एनएचएआई ने सेबी को 5,100 करोड़ रुपये की राशि एकत्रित करने के उद्देश्य से सेबी को प्रारूप भेज दिया था।

इसके तहत पूरे हो चुके राजमार्गों, जिनका कम से कम एक वर्ष का टोल संग्रह रिकॉर्ड है, के मुद्रीकरण के लिए इन्विट को स्थापित करने हेतु एनएचएआई अधिकृत है।

अग्रिम श्रेणी के निवेशक जो एनएचएआई के इन्विट में निवेश कर सकते हैं, उनमें शीर्ष तीन कनाडियाई पेंशन फंड्स और अग्रणी भारतीय बीमाकर्ता जैसे एलआईसी और एचडीएफसी लाइफ भी हैं।

कनाडा पेन्शन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड का एक कार्यक्रम

एक रिपोर्ट बताती है कि भारत के आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेन्स के अलावा कनाडा पेन्शन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (सीपीपीआईबी) और ओंटारियो टीचर्स पेन्शन प्लान (ओटीटीपी) भी संभावित निवेशक हैं।

इसके अलावा, एनएचएआई की भी योजना है कि वह प्रस्तावित इन्विट के आकार को बड़ा करके दो चरणों में लगभग 15,000 करोड़ रुपये एकत्रित करे। अप्रैल में भारतीय पावर ग्रिड निगम (पीजीसीआई) के 3,480 करोड़ रुपये एकत्रित करने के बाद एनएचआई इन्विट दूसरी ऐसी सार्वजनिक कंपनी होगी।

इन्विट के बारे में

म्युचुअल फंड्स की तरह इन्विट भी एक तंत्र होते हैं जिनका उद्देश्य कई निवेशकों से छोटी-छोटी मात्रा में राशि एकत्रित करके किसी काल में नकद प्रवाह को सुनिश्चित करने होता है।

इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स का उद्देश्य “भारतीय राजमार्ग बाज़ार में धैर्यशील पूँजी” को आकर्षित करना भी है क्योंकि ये निवेशक निर्माण जोखिम के खतरे पर नहीं हैं और ऐसी परिसंपत्तियों में निवेश के इच्छुक हैं जो दीर्घ अवधि में स्थाई रिटर्न दे।

वर्तमान में एनएचएआई अपनी फंडिंग आवश्यकताओं को टीओटी (टोल ऑपरेट ट्रान्सफर), एनआईआईएफ (राष्ट्रीय निवेश एवं इंफ्रास्ट्रक्चर कोष) के साथ साझदारी, एलआईसी को बॉन्ड जारी करके और केंद्रीय बजटीय आवंटनों से पूरा करता है।

इन्विट के मार्ग से एनएचएआई अपेक्षा कर रहा है कि पूँजी बाज़ारों के माध्यम से वह अतिरिक्त संसाधनों को लामबंद करके पूरी हो चुकी एवं परिचालित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का मुद्रीकरण करके एक और वित्तपोषण का स्रोत खोज ले।

भारत में एक टोल प्लाज़ा

कम से कम एक वर्ष के टोल संग्रह ट्रैक रिकॉर्ड वाली परियोजनाओं के अलावा एनएचएआई उन चिह्नित राजमार्गों का भी मुद्रीकरण करेगा जिनपर टोल लगाने का पास एनएचएआई के पास आरक्षित था।

जब इन्विट के मार्ग से संप्रति सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का मुद्रीकरण होगा तो एनएचएआई नए निवेशों को भारतमाला परियोजना पर केंद्रित कर सकता है। भारत सरकार की यह राजमार्ग विकास योजना है जिसका उद्देश्य 5.35 लाख करोड़ रुपये के निवेश से 24,800 किलोमीटर सड़क विकसित करना है।

इन्विट को अपेक्षा है कि वह लगभग 20-30 वर्षों के लिए एनएचएआई के लिए धैर्यशील पूँजी आकर्षित कर सकेगा। पेन्सन फंड्स एवं बीमा कंपनियों के अलावा अपेक्षा है कि संप्रभु संपत्ति कोषों के विदेशी निवेशकों के लिए भी इन्विट आकर्षक बने।

इन्विट के लिए बनीं विनियामक संरचनाएँ कॉरपोरेट सुशासन, अनिवार्य वितरण के कारण दीर्घ अवधि में स्थाई रिटर्न, कम खतरा, उच्च गुणवत्ता की परिसंपत्तियाँ और आय के वितरण पर कर में लाभ सुनिश्चित करती हैं।

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 111 लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) में 36.66 लाख करोड़ रुपये का निवेश सड़क, रेलवे, बंदरगाह और हवाई अड्डों के इंफ्रास्ट्रक्टर पर किया जाएगा।

अगले पाँच वर्षों में विशेषकर सड़क की बात करें तो उसके लिए 18 प्रतिशत यानी 19 लाख करोड़ रुपये की राशि तय की गई है। लक्ष्य है कि राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई को डेढ़ गुना कर दिया है और 12 गुना एक्सप्रेसवे हों।

वहीं, 6 लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) में सड़क की 27 प्रतिशत भागीदारी है। सड़क स्वामित्व को सार्वजनिक प्राधिकरणों की बजाय परिसंपत्ति संग्रहकों और वित्तीय निवेशकों के पक्ष में झुकाया जाएगा।