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कर्नाटक सरकार मतांतरण को लेकर राज्य में कार्यरत ईसाई मिशनरियों का सर्वेक्षण करेगी

कहा जा रहा है कि कर्नाटक में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने अधिकारियों को कार्यरत आधिकारिक और गैर-आधिकारिक ईसाई मिशनरियों का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया है।

यह आदेश ऐसे समय में आया, जब कर्नाटक जबरन मतांतरण की शिकायतों के जवाब में मतांतरण विरोधी कानून लाने पर विचार कर रहा है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण समिति की बुधवार को विकास सौधा में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।

विधायक गूलीहट्टी शेखर, पुत्तरंगा सेट्टी, बीएम फारूक, विरुपक्षप्पा बेल्लारी, अशोक नाइक और अन्य ने बैठक में भाग लिया और मामले पर चर्चा की। समिति ने मिशनरियों को सरकार से मिलने वाली सुविधाओं और ईसाई मिशनरियों के पंजीकरण पर भी चर्चा की।

समिति के सदस्यों ने मतांतरण करने वालों की सरकारी सुविधाएँ वापस लेने का सुझाव दिया। भाजपा विधायक गूलीहट्टी शेखर ने कहा कि प्राप्त हुई शुरुआती जानकारी के मुताबिक, राज्य में चल रहे 40 प्रतिशत चर्च अनौपचारिक हैं। इस संबंध में आँकड़े जुटाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने फिर से कहा कि सरकार राज्य में जबरन मतांतरण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने हेतु मतांतरण विरोधी कानून लाएगी। उन्होंने कहा, “सरकार देश में विभिन्न राज्यों द्वारा इस संबंध में लागू कानूनों का अध्ययन कर रही है। इस संबंध में कानून जल्द ही कर्नाटक में लागू किया जाएगा।”

भाजपा विधायक गूलीहट्टी शेखर ने मॉनसून सत्र के दौरान धर्म परिवर्तन का मुद्दा विधानसभा में उठाया था। उन्होंने दावा किया था कि उनकी माँ को उनकी जानकारी के बिना परिवर्तित किया गया था। यही नहीं, ईसाई मिशनरियों ने उन लोगों पर झूठे अत्याचार और बलात्कार के मामले लगवाए थे, जिन्होंने उनकी मतांतरण गतिविधियों पर सवाल उठाया था। बता दें कि उन्होंने आरोप लगाया था कि तालुक में विभिन्न समुदायों के लगभग 20,000-25,000 लोगों का मतांतरण किया गया था।