विचार
राजीव चंद्रशेखर से जानें इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण व आईटी में आत्मनिर्भर कैसे बनेगा भारत

शुक्रवार (6 अगस्त) को वेदांता रीसोर्सेज़ लिमिटेड के सहयोग से स्वराज्य द्वारा आयोजित ‘रोड टू आत्मनिर्भर भारत’ वेबिनार शृंखला में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने अपने विचार प्रकट किए।

उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए अवसर है कि वह वैश्विक स्तर पर वस्तु उत्पादक एवं सेवा प्रदाता के रूप में प्रतिस्पर्धात्मक देश बने। “आत्मनिर्भर भारत अभियान की सहायता से भारत 30 खरब डॉलर से 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकेगा लेकिन आँकड़ों से अधिक रणनीतिक स्थान प्राप्त करना मायने रखता है।”, चंद्रशेखर ने कहा।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जनसांख्यिकी लाभांश और कुशल मानव संसाधन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। “विचार है कि भारत मूल्यवान और उच्च-कौशल के मानव संसाधन का प्रदाता बन सके।”, मंत्री ने आगे कहा।

चीन का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि कोविड ने दर्शा दिया है कि इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण और तकनीकी केंद्र के रूप में लोकतांत्रिक देश ही अब विकसित होंगे। अगले कुछ माहों को चंद्रशेखर ने महत्त्वपूर्ण माना और कहा कि यदि योजनानुसार अगले कुछ महीनों में काम होता है तो यह भारत के लिए लाभकारी होगा।

स्वराज्य के सीईओ प्रसन्ना विश्वनाथन ने पूछा कि कोविड से निपटने में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेईती) ने कैसे अन्य विभागों व मंत्रालयों की सहायता की जिसके उत्तर में चंद्रशेखर ने बताया कि कोविड के समय तकनीक का महत्त्व और भी बढ़ गया।

“अर्थव्यवस्था को सुचारु रखने जैसे वर्क फ्रॉम होम में इंटरनेट व तकनीकों का उपयोग हुआ। भारत की अर्थव्यवस्था की त्वरित वापसी का कारण है मोदी सरकार के अधीन तैयार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर। आरोग्य सेतु और कोविन ऐप की भी बड़ी भूमिका रही।”, मंत्री ने बताया।

टीकाकरण में भी तकनीक का भारी उपयोग हुआ, सरकार ने समन्वय और संयोजकता के लिए भी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग किया जिससे भारत सफलतापूर्वक कोविड से लड़ा, चंद्रशेखर ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए तकनीक की शक्ति समझाई।

सोशल मीडिया के विनियमन और बिग टेक की अत्यधिक शक्तियों पर पूछा गया कि भारत किस मॉडल का पालन करेगा- चीन की तरह प्रतिबंध का या उदारवाद का जिसमें इन तकनीकी मंचों को अत्यधिक छूट है? इसपर मंत्री ने चीन मॉडल को पूर्ण रूप से नकार दिया।

“भारत संवैधानिक देश है जो हर नागरिक को कुछ अधिकार देता है। मोदी उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना चाहते हैं। उसी प्रकार तकनीकी क्षेत्र में हमने मध्यस्थ के लिए दिशानिर्देश बनाए हैं। हम चाहते हैं कि बिग टेक नागरिकों के अधिकारों का हनन न करें।”, चंद्रशेखर ने समझाया।

“समस्या निवारण अधिकारी की अनिवार्य नियुक्ति एक ऐसा ही प्रयास है। हम एक ऐसा मॉडल बना रहे हैं जो तकनीकी मंचों का उत्तरदायित्व तय करेगा। इसमें सरकार का अधिक हस्तक्षेप नहीं होगा। उपभोक्ताओं का अधिकार होगा कि वे किसी भी मंच के समक्ष अपनी समस्या रखकर समाधान प्राप्त कर सकें।”, मंत्री ने आगे कहा।

उनके अनुसार एक त्रुटिरहित समाधान पर पहुँचना कठिन है क्योंकि यह एक नया क्षेत्र है। “जब इंटरनेट आया था तब सोचा नहीं गया था कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की भी चिंता करनी होगी। मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने वाला मॉडल सही नहीं है।”, चंद्रशेखर ने सरकार की मुद्रा स्पष्ट की।

विश्वनाथन ने माना कि देश में मोबाइल विनिर्माण को बल देने में मोदी सरकार काफी हद तक सफल रही है लेकिन अभी भी कई महत्त्वपूर्ण मोबाइल उपकरण दूसरे देशों में ही बनते हैं। इसी पर उन्होंने पूछा कि आपूर्ति शृंखला में उच्चतर पायदान पर भारत कैसे पहुँच सकता है?

चंद्रशेखर ने बताया कि मोबाइल के अलावा भी भारत में कई उपकरण बनाए जा रहे हैं। “हमारी महत्वाकांक्षा है कि एक मज़बूत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी-तंत्र बनाया जाए। हम 2014 में सीमित इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माता थे। 1.9 लाख करोड़ रुपये से 5.3 लाख करोड़ रुपये की बड़ी छलांग मात्र चार वर्षों में लगाई गई है।”, उन्होंने कहा।

अब रणनीति है कि भारत में आपूर्ति शृंखलाएँ आमंत्रित और विकसित की जाएँ, चंद्रशेखर ने बताया। “हम निवेशों को आकर्षित करना चाहते हैं जो न सिर्फ उत्पाद को अंतिम रूप दें बल्कि प्राथमिक स्तर से उपकरण भारत में बनें। हमारी महत्वाकांक्षाएँ बड़ी हैं और प्रधानमंत्री के विज़न को पूरा करने हेतु कठिन परिश्रम जारी है।”, उन्होंने स्पष्ट किया।

विश्व में चल रहे सेमीकन्डक्टर अभाव के बाद कई देश स्वदेशी रूप से सिलिकॉन चिप बनाने की तैयारी कर रहे हैं। विश्वनाथन कहते हैं कि भारत ऐसा कर पाए, उसके लिए ढेर सारे सरकारी सहयोग की आवश्यकता है और चंद्रशेखर से योजना के बारे में पूछते हैं।

“इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण की रणनीति में सेमीकन्डक्टर भी सम्मिलित है। यह सरल नहीं है और इसके लिए गंभीर निवेश व अत्याधुनिक तकनीक की आवश्यकता है। हम पारिस्थितिकी-तंत्र के लिए सेमीकन्डक्टर की महत्ता समझते हैं।”, चंद्रशेखर ने बताया।

“मैं बस यह कहूँगा कि यह मामला विचाराधीन है। आज मैं निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि यह कब होगा परंतु विश्वास दिलाता हूँ कि हम इसपर काम कर रहे हैं।”, सरकार की योजना के विषय में मंत्री ने बताया।

भारत के तकनीकी क्षेत्र में उच्च स्तर के कौशल का अभाव है और दूसरी ओर बेरोजगारी है, ऐसे में किस प्रकार से कौशल विकास किया जाए, विश्वनाथन प्रश्न करते हैं। तकनीकी क्षेत्र के विषय में चंद्रशेखर बताते हैं कि मंत्रालय का अपना कौशल विकास और प्रतिभा खोज अभियान चला रहा है।

“राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाईलिट) के देश में कई केंद्र हैं और यह प्रतिवर्ष 10 लाख छोत्रों को प्रशिक्षित करता है। इसके अलावा कौशल विकास मंत्रालय भी है जो अपने स्तर पर काम कर रहा है।”, उन्होंने बताया।

मंत्री मानते हैं कि कई कंपनियाँ ऐसी हैं जिन्हें पर्याप्त अनुबंध मिले हुए हैं लेकिन कुशल मानव संसाधन के अभाव में वे समय पर परियोजनाओं को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि अगले वर्ष तक वे अपनी प्रशिक्षण क्षमता को दोगुना करेंगे।

“समस्या वास्तविक है और आवश्यकता है कि वृद्धिशील उद्योग को अधिकाधिक लोग मिलें जो वृद्धि के चालक बनें। हमारे पास अवसर भरपूर हैं लेकिन लोग सीमित हैं। हम समस्या को समझते हैं व उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्रालय के साथ मिलकर समाधान पर काम कर रहे हैं।”, चंद्रशेखर ने कहा।

अंत में विश्वनाथन पूछते हैं कि भारत स्वयं को तकनीकी उपनिवेश बनने से कैसे रोके? “आत्मनिर्भर भारत का अर्थ है कि भारत में डिज़ाइन व निर्माण हो, चाहे निर्माता किसी भी देश का हो। विज़न है कि हर निवेशक का स्वागत हो, चाहे वह किसी भी देश से आता हो।”, आत्मनिर्भर भारत पर मंत्री अपने विचार स्पष्ट करते हैं।

“नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार चाहती है कि अधिक-से-अधिक भारतीय ब्रांड वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा देने के लिए तैयार हों। लेकिन हम भारतीय कंपनियों को संरक्षण में रखने के पक्ष में नहीं हैं। हमारे लिए सभी निवेशक समान हैं। फिर भी भारतीय उद्यमियों, मंचों और बौद्धिक संपदा को समर्थन के लिए कुछ योजनाएँ हैं।”, चंद्रशेखर अपनी बात समाप्त करते हैं।