अर्थव्यवस्था
रबी फसलों पर एमएसपी वृद्धि का किसानों को कैसे मिलेगा लाभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने रबी विपणन मौसम (आरएमएस) 2022-23 के लिए सभी रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी करने को बुधवार (8 सितंबर) को स्वीकृति दी।

इसमें गेहूँ पर पिछले वर्ष की 1,975 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी को 2 प्रतिशत बढ़ाकर 2,015 रुपये कर दिया गया है। केंद्र का दावा है कि आने वाले विपणन मौसम में गेहूँ उत्पादन की लागत 1,008 रुपये प्रति क्विंटल रहेगी और इस प्रकार नई एमएसपी से किसानों को 100 प्रतिशत का लाभ मिल सकेगा।

मध्य प्रदेश के देवास जिले में खेती करने वाले एक किसान से स्वराज्य वार्ता में गेहूँ पर लागत के सरकारी दावे की पुष्टि की और साथ ही बताया कि पिछले वर्ष 300 क्विंटल से अधिक गेहूँ बेचकर उन्होंने लगभग 3 लाख रुपये का लाभ कमाया था।

“जैसे बीज खरीद और कीटनाशकों व ऊर्वरकों में बहुत खर्चा होता है। मजदूरी भी बढ़ गई है और डीज़ल का मूल्य बढ़ने से कटाई व परिवहन का खर्चा भी बढ़ेगा। ऐसे में एमएसपी में यह वृद्धि किसानों को यह अतिरिक्त खर्च करने में सहयोग करेगी।”, अनाम रहने की शर्त पर गेहूँ किसान ने बताया।

सरकार का कहना है कि एमएसपी में वृद्धि ऐसे की गई है जो तेलबीजों, दालों व पोषक अनाजों को उगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करे और फसल विविधता लाए। साथ ही पिछले कुछ वर्षों में ऐसे ही प्रयास किए गए हैं जिससे विविध फसलों की खेती करने व तकनीक अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहन मिले।

पिछले वर्ष के एमएसपी में मसूर की दाल और कैनोला (रेपसीड) तथा सरसों में उच्चतम संपूर्ण बढ़ोतरी (प्रत्येक के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल) की गई है। इसके बाद चने (130 रुपये प्रति क्विंटल) को रखा गया है। पिछले वर्ष की तुलना में कुसुम के फूल का मूल्य 114 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दिया गया है।

एमएसपी वह दर होती है जिसपर सरकार किसानों से फसल खरीदती है। वर्तमान में 23 फसलों की एमएसपी तय है जिसमें से छह रबी फसलें हैं और उनकी बुआई अक्टूबर में आरंभ होगी। आरएमएस 2022-23 के लिए रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई घोषणा के अनुरूप है।

उस समय कहा गया था कि देशभर के औसत उत्पादन को देखते हुए एमएसपी में कम से कम डेढ़ गुना वृद्धि होनी चाहिए, ताकि किसानों को तर्कसंगत और उचित मूल्य मिल सके। इस संदर्भ में देखते हैं कि नई एमएसपी दरें निम्न छह रबी फसलों के लिए किसानों को कितना लाभ दिला सकती है-

  1. गेहूँ- 2 प्रतिशत यानी 40 रुपये की वृद्धि के साथ नई एमएसपी दर 2,015 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है जो उत्पादन लागत पर 100 प्रतिशत का लाभ देगी।
  2. कैनोला और सरसों- 8.6 प्रतिशत की सर्वाधिक वृद्धि से एमएसपी 5,050 रुपये प्रति क्विटल हो गई है और इसमें भी उत्पादन लागत पर 100 प्रतिशत का लाभ मिलेगा।
  3. मसूर दाल- 7.8 प्रतिशत की वृद्धि से एमएसपी 5,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है जिससे लागत पर 79 प्रतिशत का लाभ मिलेगा।
  4. चना- 2.5 प्रतिशत वृद्धि के साथ एमएसपी 5,230 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है और यह लागत पर 60 प्रतिशत का लाभ देगी।
  5. जौ- एमएसपी में 2.2 प्रतिशत की वृद्धि की गई है जिससे यह 1,635 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है और लागत पर 60 प्रतिशत का लाभ देगी।
  6. कुसुम के फूल- 2.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ एमएसपी 5,441 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है जिससे लागत पर 50 प्रतिशत का लाभ मिलेगा।

एमएसपी में वृद्धि ऐसे समय पर की गई है जब कृषि कानून-विरोधी आंदोलन कई महीनों से चल रहा है। ध्यान दें तो इस आंदोलन के दौरान ही आरएमएस 2021-22 में एमएसपी पर अनाज की रिकॉर्ड सरकारी खरीद भी की गई थी, विशेषकर आंदोलन का केंद्र बने पंजाब व हरियाणा से।

इसपर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि एमएसपी बढ़ाने का सरकार का निर्णय दर्शाता है कि सरकार एमएसपी प्रणाली के प्रति प्रतिबद्ध है। “जो लोग भ्रम फैला रहे हैं कि एमएसपी समाप्त हो जाएगी, उन्हें इस निर्णय से सीखना चाहिए।”, तोमर ने कहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विषय पर ट्वीट किया, “किसान भाइयों और बहनों के हित में सरकार ने रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इससे जहाँ अन्नदाताओं के लिए अधिकतम लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होंगे, वहीं कई प्रकार की फसलों की बुआई के लिए भी उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा।”

राकेश टिकैत द्वारा साझा किया गया आँकड़ा

वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा के अधीन आंदोलन कर रहे किसान संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के सामने एमएसपी में वृद्धि कम है और वास्तविक मूल्य में गेहूँ के लिए एमएसपी 4 प्रतिशत से घट गई है। दूसरी ओर भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने एमएसपी वृद्धि का स्वागत किया लेकिन कहा कि कई किसान इस दर पर अनाज नहीं बेच पाते हैं।

“फसल विविधता के प्रयास व मसूर एवं सरसों को प्रोत्साहन का हम स्वागत करते हैं। इन फसलों के लिए पानी और श्रम लागत कम है तथा अब जब एमएसपी बढ़ गई है तो लाभ भी बढ़ जाएगा। आंदोलन फिर भी जारी रहेगा क्योंकि सभी किसानों से इस दर पर खरीद नहीं होती है।”, बीकेएस के बद्रीनारायण चौधरी ने कहा।