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पोप फ्रांसिस ने कनाडा के कैथोलिक विद्यालयों में किए गए उत्पीड़न के लिए क्षमा मांगी

पोप फ्रांसिस ने कैथोलिक चर्चों द्वारा संचालित कनाडा के आवासीय विद्यालयों में बड़े पैमाने पर बच्चों के यौन शोषण और उन पर किए गए दुर्व्यवहार को लेकर स्वदेशी लोगों से माफी मांगी।

पोप फ्रांसिस ने कहा, “आपकी आवाज़ सुनकर मैं उस पीड़ा, कठिनाई, भेदभाव और दुर्व्यवहार की विभिन्न रूपों वाली कहानियों और उनकी पीड़ा को समझने में सक्षम था, जो आप में से कुछ लोगों ने विशेष रूप से आवासीय विद्यालयों में अनुभव की थीं।”

उन्होंने कहा, “कैथोलिक चर्च के उन सदस्यों के निंदनीय आचरण के लिए मैं भगवान् से क्षमा मांगता हूँ और मैं आपको अपने दिल से कहना चाहता हूँ कि मुझे इसका बहुत खेद है। वैचारिक उपनिवेशीकरण कुछ ऐसा है जो आज भी हो रहा है।”

पोप फ्रांसिस ने प्रथम राष्ट्रों की सभा, मेटिस और इनुइट समुदायों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ व्यक्तिगत बैठकें करने के बाद कनाडा के तीन स्वदेशी लोगों के प्रतिनिधियों से भेंट की थी।

बता दें कि 19वीं शताब्दी से 1,50,000 से अधिक प्रथम राष्ट्र के बच्चों को मुख्यधारा के कनाडाई समाज में आत्मसात करने हेतु एक कार्यक्रम के हिस्से के रूप में राज्य-वित्त पोषित ईसाई विद्यालयों में भाग लेने के लिए विवश किया गया था।

स्वदेशी बच्चों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए विवश किया गया और उन्हें अपनी मूल भाषा बोलने की अनुमति नहीं दी गई थी। कई लोगों को पीटा गया और मौखिक रूप से प्रताड़ित किया गया था। हजारों लोग बीमारी, उपेक्षा और आत्महत्या की वजह से से मारे गए थे। कहा जाता है कि 6,000 तक लोग मारे गए थे।

2015 में 6 वर्ष की जाँच के बाद खुलासा हुआ था कि कनाडा की आवासीय विद्यालय प्रणाली, जिसने स्वदेशी बच्चों को उनके परिवारों से जबरन अलग कर दिया था, ने सांस्कृतिक नरसंहार का गठन किया था।